चारुचर्या
( प्रकाश — Hindi )
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- Unexpected character '(' in text <अच्युत भगवान् की तरह तीनों लोकों में पूज्य सदाचार विजयी हो। अच्युत भगवान् की भाँति सदाचार भी स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करता है। भगवान् और सदाचार दोनों श्री-सम्पन्न होकर सौभाग्यशाली हैं। अच्युत भगवान् सत्या (सत्यभामा) में अनुरक्त हैं तो सदाचार सत्य में आसक्त है ॥ १ ॥>
- Unexpected character '(' in text <मनुष्य को ब्राह्ममुहूर्त में आलस्य छोड़कर जाग जाना चाहिए । गुणों का आश्रय लेनेवाली श्री (शोभा) प्रातःकाल खिले हुए (जागे हुए) कमल पर जा विराजती है ॥ २ ॥>
- Unexpected character '(' in text <मनुष्य को चाहिए कि परायी स्त्री पर अनुराग और स्त्रियों पर विश्वास न करे। राम-पत्नी सीता की कामना रखने से ही रावण का वध हुआ तथा पत्नी (पर विश्वास करने) के कारण ही विदूरथ मारा गया ॥ १० ॥>
- Unexpected character '(' in text <करे । प्रमत्त होने के कारण ही वृष्णिवंश के लोग (एक दूसरे पर) तृण का प्रहार कर-कर के मर गए ॥ ११ ॥>
- Unexpected character '(' in text <सत्त्वगुण से पूर्ण व्यक्ति को चाहिए कि वह त्याग (दान) के बदले कुछ पाने की इच्छा न करे । कर्ण ने इन्द्र को अपने कुण्डलों का दान दिया परन्तु उसने शक्ति की याचना की इसलिए कर्ण में मलिनता आ गयी ॥ १९ ॥>
- Unexpected character '(' in text <ब्राह्मणों का कभी अपमान न करना चाहिए, क्योंकि (अपमानित) ब्राह्मणों का शाप ही असह्य दुःखकारक होता है। ब्राह्मण के शाप से ही राजा परीक्षित को तक्षक नाग ने काट लिया और वह ब्राह्मण की शापाग्नि में भस्म हो गया ॥ २० ॥>
- Unexpected character '(' in text <दूसरों की प्राण-रक्षा के लिए तत्पर तथा दयावान् अवश्य होना चाहिए । शिबि ने कपोत (कबूतर) की रक्षा के लिए श्येन पक्षी (बाज) को अपना शरीर ही दे डाला ॥ २३ ॥>
- Unexpected character '(' in text <कठोर तपस्या में लीन व्यक्तियों की भी इन्द्रियों पर विश्वास न करना चाहिए। (महातपस्वी होते हुए भी) विश्वामित्र ने उत्सुक हो कर मेनका अप्सरा को गले लगा लिया था ॥ ३६ ॥>
- Unexpected character '(' in text <स्वामी की सेवा में लीन निर्दोष भक्त (सेवक) का बहिष्कार न करना चाहिये। सती (निर्दोष) सीता को छोड़कर राम बहुत शोकातुर हुये थे ॥ ४४ ॥>
- Unexpected character '(' in text <सतियों की तपस्या से प्रज्वलित क्रोधाग्नि को कुपित न करना चाहिए । रावण के वध के लिए वेदवती ने अपना शरीर छोड़ (कर सीता के रूप में जन्म लिया और अन्त में उसे समूल नष्ट कर) दिया ॥>
- Unexpected character '(' in text <वृद्धावस्था आ जाने पर मोक्ष प्राप्त करने का उपाय करना चाहिए जिससे दुबारा न वृद्ध होना पड़े, न पैदा होना पड़े । विदुर ने पुनर्जन्म का बीज (शुभाशुभ कर्म) ज्ञानरूपी अग्नि में भस्म कर डाला था ॥ ९६ ॥>
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