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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
१५९
 
सुप्ताकाराः प्रसुते
सुरत्नाङ्गदैरन्वितं
 
पृष्ठम्
 
३३ स्नानव्याकुलयोषित्
 
१९ स्फुरत्कौस्तुभालंकृतं
 
पृष्ठम्
 
५७
 
३७
 
सुरमन्दिरतरु
 
६६
 
स्रक्चन्दनवनितादीन्
 
१२
 
सुवक्षोजकुम्भां
 
१३७
 
स्वदक्षजानु •
 
८५.
 
सुशान्तां सुदेहां
 
१३८
 
स्वभक्ताग्रगण्यैः
 
सुसीमन्तवेणीं
 
१३८
 
स्वभक्तेषु संदर्शिताकार
 
२०
 
सृष्ट्वा
 
सर्व स्वात्म •
 
५०
 
ह
 
सेवकाय
 
१२८
 
हर त्वं संसारं
 
११६
 
सौराष्ट्रदेशे
 
१३० हरे राम सीतापते
 
९
 
स्तवं पाण्डुरङ्गस्य
 
३८ हारस्योरुप्रभाभिः
 
३०
 
स्तुवन्ति ये
 
७४
 
हित्वा हित्वा
 
४७.
 
स्तोकभक्तितोऽपि
 
१२५
 
हिमाद्रिप्रार्श्वेऽपि
 
१३२.
 
स्तोष्ये भक्त्या
 
४५
 
हृदम्भोजे कृष्णः
 
५९.