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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
१५७
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
विष्ठपाधिपाय
 
१२७
 
शूलिने नमो नमः
 
१२८
 
विहाररासखेद
 
९.६
 
शैलेन्द्रादवतारिणी.
 
१०२
 
वीणानादनिमीलिता ०
 
८२
 
श्रद्धाभक्तिध्यान
 
५१
 
वीताखिलविषयेच्छं
 
१
 
श्रवणं तस्य देवस्य
 
११०
 
वेदवाचामवेद्यस्य
 
१०८
 
श्रिया शातकुम्भद्युति
 
२०
 
वेदान्तैश्वाध्यात्मिक
 
५०
 
श्रियाश्लिष्ट विष्णुः
 
४२
 
व्यालम्बिनीभिः
 
८८
 
श्री ताम्रपर्णी
 
१३२
 
व्योमकेश दिव्य
 
१२३
 
श्रीनाथादृत
 
१२०
 
श
 
श्रीमत्पयोनिधिनिकेतन
 
१३
 
शत्रौ मित्रे
 
६८
 
श्रीमत्यौ चारुवृत्ते
 
२६
 
शब्दब्रह्ममय
 
८३
 
श्रीमत्सुन्दरनायकीं
 
८०
 
शम्बरवैरिशरातिग •
 
१
 
श्रीमदात्मने
 
१२२
 
शरच्चन्द्रबिम्बाननं
 
३७
 
श्रीविद्यां शिववाम ०
 
७९
 
शरीरं कलत्रं
 
२०
 
श्रीविद्ये शिववाम ०
 
८१
 
शरीरं सुरूपं
 
१४०
 
श्रीशैलशृङ्गे
 
१३०
 
शिलापि त्वदङ्घ्रिक्षमा
 
७ श्रुत्यै नमोऽस्तु
 
७२
 
शिवं नित्यमेकं
 
३
 
लोकत्रयमिदं
 
११३
 
शिवपञ्चाक्षरमुद्रां
 
१२९
 
घ
 
शुक्तौ रजतप्रतिमा
 
११
 
षट्तारां गणदीपिकां
 
१२०
 
शुभपुलिने
 
९९
 
षडङ्गादिवेदो
 
१४०
 
शूलटङ्कपाश
 
८९
 
स