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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२७९
 
पृष्ठम्
 
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प्रभूता भक्तिस्ते यदपि
 
१६१
 
प्रौढist यौवनस्थो
 
७५
 
प्रभो शूलपाणे
 
७३
 

 
प्रभुत्वं दीनानां खलु
 
२९
 
फलमिह नृतया
 
८८
 
प्रमत्तवारुणीरसै •
 
°
 
१९१
 
फलाद्वा पुण्यानां
 
३०
 
प्रलोभाद्यैरथहरण •
 
३१
 

 
प्रवालप्रवाह प्रभा०
 
१६
 
बन्धूकाभैर्भानु०
 
१७२
 
प्रवेशनिर्गमाकुलैः
 
१८९
 
बहिर्दशारे सर्वार्थसाधके २०९
 
प्रशान्तेन्द्रिये नष्टसंज्ञे
 
११ बहुभिरगरुधूपैः
 
२२२
 
प्रह्वप्राचीन बर्हिः प्रमुख •
 
६९ बहुविधपरितोष०
 
४२
 
प्राक्पुण्याचलमार्ग ०
 
३५ बलमारोग्यं चायु०
 
८८
 
प्रातःकाले भावविशुद्धः
 
२५६
 
बाणत्वं वृषभत्वमर्धवपुषा ४६
 
प्रातः पाहि महाविद्ये
 
१७२ बालार्कद्युतिदाडिमी ० २२१
 
प्रातः स्तुवे
 
२४०
 
बाल्यादिष्वपि जाग्रदादिषु १०३
 
प्रातः स्मरामि
 
२३९
 
बाल्ये दुःखातिरेका ०
 
७४
 
प्रातर्नमामि
 
२३९
 
बालिशेन मया प्रोक्तमपि १८३
 
प्रातर्भजामि
 
२३९
 
बीजस्यान्तरिवाङ्कुरो
 
१०२
 
प्रातर्लिङ्गमुमापतेरहरहः
 
११५ बुद्धिः स्थिरा भवितु०
 
४५
 
प्रातर्वदामि ललिते
 
२४०
 

 
प्रान्तस्फुरद्विमलमौक्तिक ० २०५
 
भक्तिर्महेशपद •
 
४५
 
प्रियगतिरतितुङ्गो
 
२२९
 
भक्तो भक्तिगुणावृते
 
३५
 
प्रौढप्रेमाकुलाया
 
६७
 
भक्त्या किं नु समर्पिता
 
० १८८