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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२७७
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
नागररामठयुक्तं
 
११२
 
निमेषोन्मेषाभ्यां प्रलयमुदयं १३८
 
नागेन्द्रहाराय
 
११९
 
निम्बूकार्दकचूत •
 
२१२
 
नानाकारैः शक्तिकदम्बैः २५६
 
निर्यद्दानाम्बुधारा ०
 
५४
 
नानाच्छिद्र घटोदर ०
 
१०३
 
निवास : कैलासे
 
१६२
 
नानादेशसमुत्थितै ०
 
१९८
 
निवृत्तिः प्रतिष्ठा च
 
१५३
 
नानाग्नगुलुच्छालीका ०
 
१६७
 
निसर्गक्षीणस्य
 
१४४
 
नानामविचित्राणि १०७
 
निहितं कनकस्य
 
२२०
 
नाभीचकालवालान्नवनव
 
५७
 
नीराजनं निर्मलदीप्ति ०
 
११३
 
नालं वा परमोपकारकमिदं ३३
 
नीलपट्टमृदुगुच्छ •
 
१९९
 
नालं या सकृदेव देव
 
३४
 
नूनं सिंहासनेश्वर्या ०
 
१८०
 
नाहं मन्ये दैवतं
 
१७१
 
नृत्तारम्भेषु हस्ताहत •
 
नितान्तकान्तदन्त-
 
२
 
नोवा या
 
१७२
 
नित्यं योगिमन: सरोज ०
 
४५
 
नो शक्यं स्मार्तकर्म
 
७६
 
नित्यं स्वोदरपूरणाय
 
४० न्यक्कुर्वन्नुर्वराभृन्निभ०
 
६६
 
नित्यः शुद्धो निष्कल
 
२५५
 
न्यस्तो मध्ये सभायाः
 
५६.
 
नित्यमेव नियमेन जल्पतां २४८
 
प
 
नित्यानन्दरसालयं
 
३८
 
पङ्क्त्योपविष्टान्परितस्तु २१३
 
नित्याय त्रिगुणात्मने
 
४०
 
पञ्चब्रह्ममयो मञ्चस्तत्र
 
१६७
 
नित्यार्चनमिदं चित्ते
 
२१७
 
पञ्चास्त्र शान्त पञ्चास्य
 
१०७
 
निषेहि मणिपादुकोपरि
 
१९३ पदं ते कीर्तनां
 
१४७
 
निबद्धाशतिपक
 
0
 
२००
 
पदन्यासक्रीडापरि०
 
१४७