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२७६
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
पृष्ठम्
 
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धैर्याशेन निभृतं
 
५०
 
नमः शिवाभ्यां पशुपा०
 
१२४
 
ध्यात्वा चित्ते शिवाख्यं
 
७६
 
नमः शिवाभ्यां रथवा ०
 
१२३
 
ध्यानाञ्जनेन समवेक्ष्य
 
४४
 
नमः शिवाभ्यां विषमे ०
 
१२३
 
ध्यायन्नित्थं प्रभाते
 
६२
 
नमः शिवाभ्यां वृषवा ०
 
१२१
 
ध्वनन्मृदङ्गकाहलः
 
१८९
 
नमः शिवाभ्यां सरसो ०
 
१२१
 
ध्वनिध्वंसवीणालयो ०
 

 
नमः शिवाभ्यामतिसु ०
 
१२२
 

 
नमः शिवाभ्यामशुभाप ०
 
१२३
 
नखानामुद्योतैर्नव ०
 
१४२
 
नमस्ते नमस्ते
 
७३
 
नखैर्ना स्त्रीणां
 
१४७
 
नमो गौरीशाय
 
११४
 
नग्नो निःसङ्गशुद्ध ०
 
७६
 
नमोवाकं ब्रूमो
 
१४६
 
न जानामि शब्द
 

 
नोवाकमाशास्महे
 
१५६
 
नतिभिर्नुतिभिस्त्वमीश
 
४८ नम्राङ्गाणां भक्तिमतां
 
९५
 
नतेतरातिभीकरं
 

 
नम्रीभूय कृताञ्जलिप्रक० २०३
 
ननु ताडितोऽ
 
८७
 
नरं वर्षीयांसं
 
१२८
 
न भूमिर्न चापो
 
७२
 
नरत्वं देवत्वं नगवन ०
 
२८
 
नमः केकिने शक्तये
 
१३
 
नवनीपवनवास ०
 
१८३
 
नमः शिवाभ्यां कलिना०
 
१२२
 
नवरत्नमये मयार्पिते
 
२२२
 
नमः शिवाभ्यां जगदी०
 
१२२
 
न विस्मरामि चिन्मू०
 
१७६
 
नमः शिवाभ्यां जटिलं०
 
१२३
 
नवीनार्क भ्राजन्मणि०
 
१६०
 
नमः शिवाभ्यां नवयौव ०
 
१२१
 
न शक्नोमि कर्तु
 
१८
 
नमः शिवाभ्यां परमौष ०
 
१२२
 
नास्त्रीणां किन्नरीणां
 
१८०