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२६८
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
पृष्ठम्
 
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उद्यत्कान्तिकलाप०
 
१८७
 
एतावदेव जननि
 
२४१
 
उद्यत्तावकदेहकान्ति ०
 
२०५
 
एषा भक्त्या तव
 
२३४
 
उपास्यमाना विप्रेन्द्रैः
 
१६५ एष्यत्येष जनिं मनोऽस्य
 
४६
 
उपेक्षा नो चेकि
 
२९ एलालवङ्गादिसमन्वितानि २२७
 
उमया दिव्यसु ०
 
८०
 
एलाशुण्ठीसहितं
 
१११
 
उल्लसत्कनककान्ति ०
 
उषसि मागधमङ्गल ०
 
२१८
 
उष्णोदकैः पाणियुगं
 
२१० एलोशीरसुवासितैः
 
२२६ ऐक्यं निजभक्तेभ्यो
 
२२१
 

 
८१
 

 

 
ऊरीकुरु मामज्ञम ०
 
८०
 
ओमिति तव निर्देष्ट्री
 
८२
 
ओमित्येतद्यस्य बुधै ०
 
९५.
 
ऋक्षाधीश किरीट
 
८१
 

 
ऋषिवर मानसहंस
 
८०
 
औदास्यं स्फुटयति
 
८२
 

 

 
८१
 
कंचित्काल मामहेश
 
४६
 

 
कचे चन्द्ररेखं कुचे
 
१५६
 
एकं सदिति श्रुत्या
 
८१
 
कण्ठप्रान्तावसज ०
 
५३
 
एको वारिजबान्धवः
 
४०
 
कण्ठात्कुण्डलिनी
 
१७९
 
एणाङ्कानलभानु०
 
२४९
 
कण्ठाषार्थमाता
 
६७
 
एतच्चम्पकतैलमम्ब २२० कदम्बमञ्जरीनिर्यद्वा०
 
१६६
 
एतस्मिन्मणिखचिते २२३ कदम्बवनचारिणी
 
२३६