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लोकानुक्रमणिका ।
 
२६७
 
पृष्ठम्
 
२०१
 
६८
 
४१
 
आनन्दायेन्दुकान्तोपल •
 
आनन्दाश्रुभिरातनोति
 
पृष्ठम्
 
इदं ते युक्तं वा परमशिव ५०
 
इदानीमिदानी
 
२२
 
आनीतेनातिशुभ्रेण
 
१०७
 
इन्द्रादयो नतितै ०
 
२२९
 
आमुक्तान रत्नप्रकर०
 
५७
 
इन्द्रादींश्च दिगीश्वरा ०
 
१९०
 
आम्नायाम्बुधिमादरेण
 
३५
 
इभचर्माम्बर
 
७९
 
आयुर्नश्यति पश्यतां
 
७८
 
इमं स्तवं प्रात०
 
आरक्तश्वेतपीतस्फुरदुरु ०
 
२०१
 
आरूढप्रौढवेगप्रचि ०
 
आरूढभक्तिगुण
 

 
४३
 
आलवालमित्र
 
इष्टानिष्टप्राप्तिविच्छित्तिहेतुः १८१
 
५४ इहायाहि वत्सेति
 
१९९ ईकारोर्ध्वगबिन्दुरान०
 
आलम्ब्य स्वसखीं
 
१०
 

 
२११
 
ईश गिरीश
 
८०
 
आशापाशक्लेशदुर्वा •
 

 
४४
 
ईशत्वनाम कलुषा
 
२४१
 
आशापाशक्लेशविना ०
 
२५६
 
ईशानादिपदं शिवैक
 

 
२४९
 
आश्लेषेष्वद्रिजायाः
 
५८
 
ईशाने गणपं स्मरामि
 
२०६
 
आसीनस्याधिपीठं
 
५६
 

 
आस्तीर्णारुणकम्बलासन ० १९१
 
उच्चैस्तोरणवर्ति
 
१९२
 

 
उडुकृत परिवेषस्पर्धया
 
१९७
 
इति गिरिवरपुत्री ०
 
२५३
 
उड्यानजालंधर ०
 
२०७
 
इति प्रेमभारण
 
१५८ उत्तुङ्गालयविस्फुर ०
 
१८८
 
इति श्रीभवान
 
२५९
 
उदञ्चद्भुजावल्लरी •
 

 
इतीमां महच्छ्री०
 
२६१
 
उद्गन्धैरगरुद्रवैः
 
१९४