2026-03-04 04:45:09 by akprasad
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<ignore>स्वात्मनिरूपणम् ।
५१</ignore>
<verse>तत्त्वातीतपदोऽहं तनुरहमस्मीति भावरहितोऽहम् ।
तामसदुरधिगमोऽहं तत्त्वंपदबोधबोध्यहृदयोऽहम् ॥
</verse>
<verse>दैवतदैत्यनिशाचरमानवतिर्यङ्महीधरादिरहम् ।
देहेन्द्रियरहितोऽहं दक्षिणपूर्वादिदिग्विभागोऽहम् ॥
</verse>
<verse>धर्माधर्ममयोऽहं धर्माधर्मादिबन्धरहितोऽहम् ।
धार्मिक जनसुलभोऽहं धन्योऽहं धातुरादिभूतोऽहम् ॥
</verse>
<verse>नामादिविरहितोऽहं नरकस्वर्गापवर्गरहितोऽहम् ।
नादान्तवेदितोऽहं नानाविधनिखिलनिगमसारोऽहम् ॥
</verse>
<verse>परजीवभेदबाधकपरमार्थज्ञानशुद्धचित्तोऽहम् ।
५१
प्रकृतिरहं विकृतिरहं परिणतिरहमस्मि भागधेयानाम् ॥
</verse>
<verse>फणधरभूधरवारणविग्रह विधृतप्रपञ्चसारोऽहम् ।
फालतलोदितलोचनपावकपरिभूतपञ्चवाबाणोऽहम् ॥ १३२ ॥
</verse>
<verse>बद्धो भवामि नाहं बन्धान्मुक्तस्तथापि नैवाहम् ।
बोध्यो भवामि नाहं बोधोऽहं नैव बोधको नाहम् ॥
</verse>
<verse>भक्तिरहं भजनमहं भुक्तिरहं भुक्तिमुक्तिरहमेव ।
भूतानुशासनोऽहं भूतभवद्भव्यमूलभूतोऽहम् ॥ १३४ ॥
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<ignore>स्वात्मनिरूपणम् ।
५१</ignore>
<verse>तत्त्वातीतपदोऽहं तनुरहमस्मीति भावरहितोऽहम् ।
तामसदुरधिगमोऽहं तत्त्वंपदबोधबोध्यहृदयोऽहम् ॥
<verse>दैवतदैत्यनिशाचरमानवतिर्यङ्महीधरादिरहम् ।
देहेन्द्रियरहितोऽहं दक्षिणपूर्वादिदिग्विभागोऽहम् ॥
<verse>धर्माधर्ममयोऽहं धर्माधर्मादिबन्धरहितोऽहम् ।
धार्मिक
<verse>नामादिविरहितोऽहं नरकस्वर्गापवर्गरहितोऽहम् ।
नादान्तवेदितोऽहं नानाविधनिखिलनिगमसारोऽहम् ॥
<verse>परजीवभेदबाधकपरमार्थज्ञानशुद्धचित्तोऽहम् ।
५१
प्रकृतिरहं विकृतिरहं परिणतिरहमस्मि भागधेयानाम् ॥
<verse>फणधरभूधरवारणविग्रह
फालतलोदितलोचनपावकपरिभूतपञ्च
<verse>बद्धो भवामि नाहं बन्धान्मुक्तस्तथापि नैवाहम् ।
बोध्यो भवामि नाहं बोधोऽहं नैव बोधको नाहम् ॥
<verse>भक्तिरहं भजनमहं भुक्तिरहं भुक्तिमुक्तिरहमेव ।
भूतानुशासनोऽहं भूतभवद्भव्यमूलभूतोऽहम् ॥ १३४ ॥
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