2026-05-06 05:43:46 by akprasad
This page does not need to be proofread.
३०८.
ईशान पत्र कु
पुस्तकालय
वन
मीमांसा
सूत्रभाष्यम् ॥
-
याम्
सुतरभावानु
प्रत्ययगोगर
केयुष्मत्प्रत्ययगो-
तद्विपर्ययेण विपयि-
ईशान पत्र कु
पुस्तकालय
वन
मीमांसा
सूत्रभाष्यम् ॥
-
याम्
सुतरभावानु
प्रत्ययगोगर
केयुष्मत्प्रत्ययगो-
तद्विपर्ययेण विपयि-