Reports » योगशिखोपनिषत्
Updated 2026-05-10 22:04
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<trailer n="trailer">इति योगशिखोपनिषत्सु द्वितीयः खण्डः ॥ २ ॥</trailer>
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<trailer n="trailer">इति योगशिखोपनिषत्सु तृतीयः खण्डः ॥ ३ ॥</trailer>
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<trailer n="trailer">इत्याथर्वणीया योगशिखोपनिषत्समाप्ता ॥ ११९ ॥</trailer>
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Text
Devanagari text is well-formed ✓ Passed (41/41)
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Verse numbers match `n` attribute — N/A (0/0)
Meter
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Verse 1.1
<lg n="1.1">
<l>ॐ योगशिखां प्रवक्ष्यामि सर्वज्ञानेषु चोत्तमाम् । यदा तु ध्यायते मन्त्रं</l>
<l>गात्रकम्पोऽभिजायते ॥ १ ॥</l>
</lg>
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आ
G
|
ऊं
G
|
यो
G
|
ग
L
|
शि
L
|
खां
G
|
प्र
L
|
व
G
|
क्ष्या
G
|
मि
L
|
स
G
|
र्व
G
|
ज्ञा
G
|
ने
G
|
षु
L
|
चो
G
|
त्त
L
|
मा
G
|
म्य
L
|
दा
G
|
तु
G
|
ध्या
G
|
य
L
|
ते
G
|
म
G
|
न्त्रं
G
|
|
गा
G
|
त्र
L
|
क
G
|
म्पो
G
|
भि
L
|
जा
G
|
य
L
|
ते
G
|
Verse 1.3
<lg n="1.3">
<l>मनः सर्वत्र संयम्य ओंकारं</l>
<l>तत्र चिन्तयेत् । ध्यायेत सततं प्राज्ञो हृत्कृत्वा परमेष्ठिनम् ॥ ३ ॥</l>
</lg>
|
म
L
|
नः
G
|
स
G
|
र्व
G
|
त्र
L
|
सं
G
|
य
G
|
म्य
L
|
ओं
G
|
का
G
|
रं
G
|
||||||||||
|
त
G
|
त्र
L
|
चि
G
|
न्त
L
|
ये
G
|
त्ध्या
G
|
ये
G
|
त
L
|
स
L
|
त
L
|
तं
G
|
प्रा
G
|
ज्ञो
G
|
हृ
G
|
त्कृ
G
|
त्वा
G
|
प
L
|
र
L
|
मे
G
|
ष्ठि
L
|
नम्
L
|
Verse 1.4
<lg n="1.4">
<l>एक-</l>
<l>स्तम्भे नवद्वारे त्रिस्थूणे पञ्चदैवते । ईदृशे तु शरीरे वा मतिमानुपलक्षयेत् ॥ ४ ॥</l>
</lg>
|
ए
G
|
क
L
|
||||||||||||||||||||||||||||
|
स्त
G
|
म्भे
G
|
न
L
|
व
G
|
द्वा
G
|
रे
G
|
त्रि
G
|
स्थू
G
|
णे
G
|
प
G
|
ञ्च
L
|
दै
G
|
व
L
|
ते
G
|
ई
G
|
दृ
L
|
शे
G
|
तु
L
|
श
L
|
री
G
|
रे
G
|
वा
G
|
म
L
|
ति
L
|
मा
G
|
नु
L
|
प
L
|
ल
G
|
क्ष
L
|
येत्
G
|
Verse 1.5
<lg n="1.5">
<l>आदित्यमण्डलं दिव्यं रश्मिज्वालासमाकुलम् । तस्य मध्यगतो वह्निः</l>
<l>प्रज्वलेद्दीपवर्तिवत् ॥ ५ ॥</l>
</lg>
|
आ
G
|
दि
G
|
त्य
L
|
म
G
|
ण्ड
L
|
लं
G
|
दि
G
|
व्यं
G
|
र
G
|
श्मि
G
|
ज्वा
G
|
ला
G
|
स
L
|
मा
G
|
कु
L
|
ल
G
|
म्त
G
|
स्य
L
|
म
G
|
ध्य
L
|
ग
L
|
तो
G
|
व
G
|
ह्निः
G
|
|
प्र
G
|
ज्व
L
|
ले
G
|
द्दी
G
|
प
L
|
व
G
|
र्ति
L
|
वत्
L
|
Verse 2.2
<lg n="2.2">
<l>भिन्दन्ति योगिनः</l>
<l>सूर्यं योगाभ्यासेन वै पुनः ॥ २ ॥</l>
</lg>
|
भि
G
|
न्द
G
|
न्ति
L
|
यो
G
|
गि
L
|
नः
G
|
||||
|
सू
G
|
र्यं
G
|
यो
G
|
गा
G
|
भ्या
G
|
से
G
|
न
L
|
वै
G
|
पु
L
|
नः
G
|
Verse 3.1
<lg n="3.1">
<l>अथ न ध्यायेज्जन्तुरालस्याच्च प्रमादतः । यदि त्रिकालमावर्तेत्स गच्छे-</l>
<l>त्परमं पदम् ॥ १ ॥</l>
</lg>
|
अ
L
|
थ
L
|
न
G
|
ध्या
G
|
ये
G
|
ज्ज
G
|
न्तु
L
|
रा
G
|
ल
G
|
स्या
G
|
च्च
G
|
प्र
L
|
मा
G
|
द
L
|
तः
G
|
य
L
|
दि
G
|
त्रि
L
|
का
G
|
ल
L
|
मा
G
|
व
G
|
र्ते
G
|
त्स
L
|
ग
G
|
च्छे
G
|
|
त्प
L
|
र
L
|
मं
G
|
प
L
|
दम्
L
|
Verse 3.2
<lg n="3.2">
<l>पुण्यमेतत्समासाद्य संक्षेपात्कथितं मया । लब्धयोगेन</l>
<l>बोद्धव्यं प्रसन्नं परमेष्ठिनम् ॥ २ ॥</l>
</lg>
|
पु
G
|
ण्य
L
|
मे
G
|
त
G
|
त्स
L
|
मा
G
|
सा
G
|
द्य
L
|
सं
G
|
क्षे
G
|
पा
G
|
त्क
L
|
थि
L
|
तं
G
|
म
L
|
या
G
|
ल
G
|
ब्ध
L
|
यो
G
|
गे
G
|
न
L
|
|
बो
G
|
द्ध
G
|
व्यं
G
|
प्र
L
|
स
G
|
न्नं
G
|
प
L
|
र
L
|
मे
G
|
ष्ठि
L
|
नम्
L
|
Verse 3.3
<lg n="3.3">
<l>जन्मान्तरसहस्रेषु यदा नाश्नाति किल्बि-</l>
<l>षम् । तदा पश्यन्ति योगेन संसारच्छेदनं परं संसारच्छेदनं परमिति ॥ ३ ॥</l>
</lg>
|
ज
G
|
न्मा
G
|
न्त
L
|
र
L
|
स
L
|
ह
G
|
स्रे
G
|
षु
L
|
य
L
|
दा
G
|
ना
G
|
श्ना
G
|
ति
L
|
कि
G
|
ल्बि
L
|
||||||||||||
|
ष
G
|
म्त
L
|
दा
G
|
प
G
|
श्य
G
|
न्ति
L
|
यो
G
|
गे
G
|
न
L
|
सं
G
|
सा
G
|
र
G
|
च्छे
G
|
द
L
|
नं
G
|
प
L
|
रं
G
|
सं
G
|
सा
G
|
र
G
|
च्छे
G
|
द
L
|
नं
G
|
प
L
|
र
L
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मि
L
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ति
L
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