Reports » विष्णुपादादिकेशान्तस्तोत्रम्
Updated 2026-03-01 06:25
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Text
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Meter
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Verse 13
<lg n="13"> <l>आक्रामद्भयां त्रिलोकीमसुरसुरपती तत्क्षणादेव नीतौ</l> <l>याभ्यां वैरोचनीन्द्रौ युगपदपि विपत्संपदोरेकधाम ।</l> <l>ताभ्यां ताम्रोदराभ्यां मुहुरहमजितस्याञ्चिताभ्यामुभाभ्यां</l> <l>प्राज्यैश्वर्यप्रदाभ्यां प्रणतिमुपगतः पादपङ्केरुहाभ्याम् ॥</l> </lg>
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Verse 16
<lg n="16"> <l>यस्यां दृष्ट्वामलायां प्रतिकृतिममराः संभवन्त्यानमन्तः</l> <l>सेन्द्राः सान्द्रीकृतेर्ष्यास्त्वपरसुरकुलाशङ्कयातङ्कवन्तः ।</l> <l>सा सद्यः सातिरेकां सकलसुखकरीं संपदं साधयेन्न-</l> <l>श्चञ्चच्चार्वंशुचक्रा चरणनलिनयोश्चक्रपाणेर्नखाली ॥</l> </lg>
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Verse 17
<lg n="17"> <l>पादाम्भोजन्मसेवासमवनतसुरव्रातभास्वत्किरीट-</l> <l>प्रत्युप्तोच्चावचाश्मप्रवरकरगणैश्चित्रितं यद्विभाति ।</l> <l>नम्राङ्गानां हरेर्नो हरिदुपलमहाकूर्मसौन्दर्यहारि-</l> <l>च्छायं श्रेयःप्रदायि प्रपदयुगमिदं प्रापयेत्पापमन्तम् ॥</l> </lg>
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Verse 32
<lg n="32"> <l>हारस्योरुप्रभाभिः प्रतिनववनमालांशुभिः प्रांशुरूपैः</l> <l>श्रीभिश्चाप्यङ्गदानां कबलितरुचि यन्निष्कभाभिश्च भाति ।</l> <l>बाहुल्येनैव बद्धाञ्जलिपुटमजितस्याभियाचामहे त-</l> <l>द्बन्धार्तिं बाधतां नो बहुविहतिकरीं बन्धुरं बाहुमूलम् ॥</l> </lg>
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Verse 37
<lg n="37"> <l>ब्रह्मन्ब्रह्मण्यजिह्मां मतिमपि कुरुषे देव संभावये त्वां</l> <l>शंभो शक्र त्रिलोकीमवसि किममरैर्नारदाद्याः सुखं वः ।</l> <l>इत्थं सेवावनम्रं सुरमुनिनिकरं वीक्ष्य विष्णोः प्रसन्न-</l> <l>स्यास्येन्दोरास्रवन्ती वरवचनसुधाह्लादयेन्मानसं नः ॥</l> </lg>
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Verse 38
<lg n="38"> <l>कर्णस्थस्वर्णकम्रोज्ज्वलमकरमहाकुण्डलप्रोतदीप्य-</l> <l>न्माणिक्यश्रीप्रतानैः परिमिलितमलिश्यामलं कोमलं यत् ।</l> <l>प्रोद्यत्सूर्यांशुराजन्मरकतमुकुराकारचोरं मुरारे-</l> <l>र्गाढामागामिनीं नः शमयतु विपदं गण्डयोर्मण्डलं तत् ॥</l> </lg>
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Verse 42
<lg n="42"> <l>लक्ष्माकारालकालिस्फुरदलिकशशाङ्कार्धसंदर्शमील-</l> <l>न्नेत्राम्भोजप्रबोधोत्सुकनिभृततरालीनभृङ्गच्छटाभे ।</l> <l>लक्ष्मीनाथस्य लक्ष्यीकृतविबुधगणापाङ्गबाणासनार्ध-</l> <l>च्छाये नो भूरिभूतिप्रसवकुशलते भ्रूलते पालयेताम् ॥</l> </lg>
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Verse 43
<lg n="43"> <l>रूक्षस्मारेक्षुचापच्युतशरनिकरक्षीणलक्ष्मीकटाक्ष-</l> <l>प्रोत्फुल्लत्पद्ममालाविलसितमहितस्फाटिकैशानलिङ्गम् ।</l> <l>भूयाद्भूयो विभूत्यै मम भुवनपतेर्भूलताद्वन्द्वमध्या-</l> <l>दुत्थं तत्पुण्ड्रमूर्ध्वं जनिमरणतमःखण्डनं मण्डनं च ॥</l> </lg>
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Verse 47
<lg n="47"> <l>यत्र प्रत्युप्तरत्नप्रवरपरिलसद्भूरिरोचिष्प्रतान-</l> <l>स्फूर्त्यां मूर्तिर्मुरारेर्द्युमणिशतचितव्योमवद्दुर्निरीक्ष्या ।</l> <l>कुर्वत्पारेपयोधि ज्वलदकृशशिखाभास्वदौर्वाग्निशङ्कां</l> <l>शश्वन्नः शर्म दिश्यात्कलिकलुषतमःपाटनं तत्किरीटम् ॥</l> </lg>
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य
G
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त्र
G
|
प्र
G
|
त्यु
G
|
प्त
L
|
र
G
|
त्न
G
|
प्र
L
|
व
L
|
र
L
|
प
L
|
रि
L
|
ल
L
|
स
G
|
द्भू
G
|
रि
L
|
रो
G
|
चि
G
|
ष्प्र
L
|
ता
G
|
न
L
|
|
स्फू
G
|
र्त्यां
G
|
मू
G
|
र्ति
G
|
र्मु
L
|
रा
G
|
रे
G
|
र्द्यु
L
|
म
L
|
णि
L
|
श
L
|
त
L
|
चि
L
|
त
G
|
व्यो
G
|
म
L
|
व
G
|
द्दु
G
|
र्नि
L
|
री
G
|
क्ष्या
G
|
|
कु
G
|
र्व
G
|
त्पा
G
|
रे
G
|
प
L
|
यो
G
|
धि
G
|
ज्व
L
|
ल
L
|
द
L
|
कृ
L
|
श
L
|
शि
L
|
खा
G
|
भा
G
|
स्व
L
|
दौ
G
|
र्वा
G
|
ग्नि
L
|
श
G
|
ङ्कां
G
|
|
श
G
|
श्व
G
|
न्नः
G
|
श
G
|
र्म
L
|
दि
G
|
श्या
G
|
त्क
L
|
लि
L
|
क
L
|
लु
L
|
ष
L
|
त
L
|
मः
G
|
पा
G
|
ट
L
|
नं
G
|
त
G
|
त्कि
L
|
री
G
|
टम्
L
|
Verse 50
<lg n="50"> <l>यस्माद्वाचो निवृत्ताः सममपि मनसा लक्षणामीक्षमाणाः</l> <l>स्वार्थालाभात्परार्थव्यपगमकथनश्लाघिनो वेदवादाः ।</l> <l>नित्यानन्दं स्वसंविन्निरवधिविमलस्वान्तसंक्रान्तबिम्ब-</l> <l>च्छायापत्यापि नित्यं सुखयति यमिनो यत्तदव्यान्महो नः ॥</l> </lg>
|
य
G
|
स्मा
G
|
द्वा
G
|
चो
G
|
नि
L
|
वृ
G
|
त्ताः
G
|
स
L
|
म
L
|
म
L
|
पि
L
|
म
L
|
न
L
|
सा
G
|
ल
G
|
क्ष
L
|
णा
G
|
मी
G
|
क्ष
L
|
मा
G
|
णाः
G
|
|
स्वा
G
|
र्था
G
|
ला
G
|
भा
G
|
त्प
L
|
रा
G
|
र्थ
G
|
व्य
L
|
प
L
|
ग
L
|
म
L
|
क
L
|
थ
L
|
न
G
|
श्ला
G
|
घि
L
|
नो
G
|
वे
G
|
द
L
|
वा
G
|
दाः
G
|
|
नि
G
|
त्या
G
|
न
G
|
न्दं
G
|
स्व
L
|
सं
G
|
वि
G
|
न्नि
L
|
र
L
|
व
L
|
धि
L
|
वि
L
|
म
L
|
ल
G
|
स्वा
G
|
न्त
L
|
सं
G
|
क्रा
G
|
न्त
L
|
बि
G
|
म्ब
L
|
|
च्छा
G
|
या
G
|
प
G
|
त्या
G
|
पि
L
|
नि
G
|
त्यं
G
|
सु
L
|
ख
L
|
य
L
|
ति
L
|
य
L
|
मि
L
|
नो
G
|
य
G
|
त्त
L
|
द
G
|
व्या
G
|
न्म
L
|
हो
G
|
नः
G
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