Reports » श्रीवेंकटेशप्रपत्तिः
Updated 2026-03-08 06:31
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Text
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Meter
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Verse 2
<lg n="2"> <l>श्रीमन् कृपाजलनिधे कृतसर्वलोक</l> <l>सर्वज्ञ शक्त नतवत्सल सर्वशेषिन् ।</l> <l>स्वामिन् सुशील सुलभाश्रितपारिजात</l> <l>श्रीवेंकटेश चरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ २ ॥</l> </lg>
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श्री
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Verse 3
<lg n="3"> <l>आनू पुरार्पितसुजातसुगन्धिपुष्प-</l> <l>सौरभ्यसौरभकरौ समसन्निवेशौ</l> <l>सौम्यौ सदानुभवनेऽपि नवानुभाव्यौ</l> <l>श्रीवेंकटेश<supplied> </supplied>चरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ३ ॥</l> </lg>
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पु
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वा
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वें
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Verse 4
<lg n="4"> <l>सद्यो विकासिसमुदित्वरसान्द्रराग-</l> <l>सौरभ्यनिर्भरसरोरुहसाम्यवार्ताम् ।</l> <l>सम्यक्षु साहसपदेषु विलेखयन्तौ</l> <l>श्रीवेंकटेश<supplied> </supplied>चरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ४ ॥</l> </lg>
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दि
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त्व
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सा
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रा
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र्भ
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रो
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Verse 5
<lg n="5"> <l>रेखामयध्वजसुधाकलशातपत्र-</l> <l>वज्रांकुशाम्बुरुहकल्पकशङ्खचक्रेः ।</l> <l>भव्यैरलंकृततलौ परतत्त्वचिह्नैः</l> <l>श्रीवेंकटेश<supplied> </supplied>चरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ५ ॥</l> </lg>
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ज्रां
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कु
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शा
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म्बु
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ल्प
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ह्नैः
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Verse 8
<lg n="8"> <l>लक्ष्मीमहीतदनुरूपनिजानुभाव-</l> <l>नीलादिदिव्यमहिषीकरपल्लवानाम् ।</l> <l>आरुण्यसंक्रमणतः किल सान्द्ररागौ</l> <l>श्रीवेंकटेश<supplied> </supplied>चरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ८ ॥</l> </lg>
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क्ष्मी
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ही
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जा
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नु
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श्री
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Verse 9
<lg n="9"> <l>नित्यानमद्विधिशिवादिकिरीटकोटि-</l> <l>प्रत्युप्तदीप्तनवरत्नमहःप्ररोहैः ।</l> <l>नीराजनाविधिमुदारमुपादधानौ</l> <l>श्रीवेंकटेश<supplied> </supplied>चरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ९ ॥</l> </lg>
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श्री
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Verse 11
<lg n="11"> <l>पार्थाय तत्सदृशसारथिना त्वयैव</l> <l>यौ दर्शितौ स्वचरणौ शरणं व्रजेति ।</l> <pb n="11"/> <l>भूयोऽपि मह्यमिह तौ करदर्शितौ ते</l> <l>श्रीवेंकटेश चरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ ११ ॥</l> </lg>
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मि
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श्री
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Verse 15
<lg n="15"> <l>सत्त्वोत्तरैस्सततसेव्यपदाम्बुजेन</l> <l>संसारतारकदयार्द्रदृगञ्चलेन ।</l> <l>सौम्योपयन्तुमुनिना मम दर्शितौ ते</l> <l>श्रीवेंकटेश चरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ १५ ॥</l> </lg>
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स्स
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