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Reports » श्रीरङ्गनायिकास्तोत्रम्

Updated 2026-05-10 04:57

XML

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<lg n="18">
  <l>मातः श्रीः सिन्धुकन्ये कुवलयशफरीपद्मसौगन्धिकादि-</l>
  <l>प्रस्पर्धिस्फारनेत्रे सरसिजवदने दिव्यलावण्यगात्रे ।</l>
  <l>बिम्बश्रीविद्रुमाभाधररुचिलसिते दिव्यवक्षोजदीप्रे<subst>
      <del>पद्मे </del>
      <add>रक्ष</add>
    </subst>श्रीरङ्गहर्म्याङ्गणकनकलते त्वत्कटाक्षैः शुभैर्माम् ॥ १८ ॥</l>
</lg>
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<trailer/>
All blocks have unique identifiers ✓ Passed (23/23)
Verse-only texts: <lg> slugs do not contain 'lg' ✓ Passed (22/22)

Text

Devanagari text is well-formed ✓ Passed (111/111)
No leading or trailing spaces in text elements ✓ Passed (85/85)
Verse numbers match `n` attribute ✓ Passed (22/22)

Meter

All verses have a known meter ⚠ Partial (18/22)
Verse 4
<lg n="4">
  <l>दुर्वृत्तं दुर्मनीषं भवजलधिगतं विष्णुभक्तापराधै-</l>
  <l>र्वाग्गात्रस्वान्तजन्यैर्भरितमशरणं गर्हितं सर्वलोकैः ।</l>
  <l>नित्यं मूर्ख नृशंसं मदनपरवशं मोहवश्यप्रवश्यं</l>
  <l>दुःखाब्धौ मज्जितं मां सपदि हि कमले पाहि मातः प्रसीद ॥ ४ ॥</l>
</lg>
दु
G
र्वृ
G
त्तं
G
दु
G
र्म
L
नी
G
षं
G
भ
L
व
L
ज
L
ल
L
धि
L
ग
L
तं
G
वि
G
ष्णु
L
भ
G
क्ता
G
प
L
रा
G
धै
G
र्वा
G
ग्गा
G
त्र
G
स्वा
G
न्त
L
ज
G
न्यै
G
र्भ
L
रि
L
त
L
म
L
श
L
र
L
णं
G
ग
G
र्हि
L
तं
G
स
G
र्व
L
लो
G
कैः
G
नि
G
त्यं
G
मू
G
र्ख
L
नृ
L
शं
G
सं
G
म
L
द
L
न
L
प
L
र
L
व
L
शं
G
मो
G
ह
L
व
G
श्य
G
प्र
L
व
G
श्यं
G
दुः
G
खा
G
ब्धौ
G
म
G
ज्जि
L
तं
G
मां
G
स
L
प
L
दि
L
हि
L
क
L
म
L
ले
G
पा
G
हि
L
मा
G
तः
G
प्र
L
सी
G
द
L
Verse 13
<lg n="13">
  <l>युष्मत्पदाम्बुजयुगं शरणं गतस्य</l>
  <l>मातः प्रयच्छ वरदे जगतां प्रियं मे ।</l>
  <l>श्रीरङ्गनायकि मनोहरदिव्यरूपे</l>
  <l>पाहि प्रसीद कमले सुभगे सुशीले ॥ १३ ॥</l>
</lg>
यु
G
ष्म
G
त्प
L
दा
G
म्बु
L
ज
L
यु
L
गं
G
श
L
र
L
णं
G
ग
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त
G
स्य
L
मा
G
तः
G
प्र
L
य
G
च्छ
L
व
L
र
L
दे
G
ज
L
ग
L
तां
G
प्रि
L
यं
G
मे
G
श्री
G
र
G
ङ्ग
L
ना
G
य
L
कि
L
म
L
नो
G
ह
L
र
L
दि
G
व्य
L
रू
G
पे
G
पा
G
हि
G
प्र
L
सी
G
द
L
क
L
म
L
ले
G
सु
L
भ
L
गे
G
सु
L
शी
G
ले
G
Verse 18
<lg n="18">
  <l>मातः श्रीः सिन्धुकन्ये कुवलयशफरीपद्मसौगन्धिकादि-</l>
  <l>प्रस्पर्धिस्फारनेत्रे सरसिजवदने दिव्यलावण्यगात्रे ।</l>
  <l>बिम्बश्रीविद्रुमाभाधररुचिलसिते दिव्यवक्षोजदीप्रे<subst>
      <del>पद्मे </del>
      <add>रक्ष</add>
    </subst>श्रीरङ्गहर्म्याङ्गणकनकलते त्वत्कटाक्षैः शुभैर्माम् ॥ १८ ॥</l>
</lg>
मा
G
तः
G
श्रीः
G
सि
G
न्धु
L
क
G
न्ये
G
कु
L
व
L
ल
L
य
L
श
L
फ
L
री
G
प
G
द्म
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सौ
G
ग
G
न्धि
L
का
G
दि
L
प्र
G
स्प
G
र्धि
G
स्फा
G
र
L
ने
G
त्रे
G
स
L
र
L
सि
L
ज
L
व
L
द
L
ने
G
दि
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व्य
L
ला
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व
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ण्य
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गा
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त्रे
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बि
G
म्ब
G
श्री
G
वि
G
द्रु
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मा
G
भा
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ध
L
र
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रु
L
चि
L
ल
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सि
L
ते
G
दि
G
व्य
L
व
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क्षो
G
ज
L
दी
G
प्रे
G
प
G
द्मे
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र
G
क्ष
G
श्री
G
र
G
ङ्ग
L
ह
G
र्म्या
G
ङ्ग
L
ण
L
क
L
न
L
क
L
ल
L
ते
G
त्व
G
त्क
L
टा
G
क्षैः
G
शु
L
भै
G
र्माम्
G
Verse 19
<lg n="19">
  <l>मां रक्ष रङ्गिदयिते मधुरैः कटाक्षै-</l>
  <l>राभोगतुङ्गरुचिरस्तनभासमाने ।</l>
  <l>सर्वेश्वरस्तव सुदर्शनलोलदृष्टि-</l>
  <l>स्त्वां वीक्षते तव पतिः सततं सुशीले ॥ १९ ॥</l>
</lg>
मां
G
र
G
क्ष
L
र
G
ङ्गि
L
द
L
यि
L
ते
G
म
L
धु
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रैः
G
क
L
टा
G
क्षै
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रा
G
भो
G
ग
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तु
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ङ्ग
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रु
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चि
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र
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स्त
L
न
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भा
G
स
L
मा
G
ने
G
स
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र्वे
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श्व
L
र
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स्त
L
व
L
सु
L
द
G
र्श
L
न
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लो
G
ल
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दृ
G
ष्टि
L
स्त्वां
G
वी
G
क्ष
L
ते
G
त
L
व
L
प
L
तिः
G
स
L
त
L
तं
G
सु
L
शी
G
ले
G