Reports » शिवानन्दलहरी
Updated 2026-03-02 01:21
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Text
Devanagari text is well-formed ✓ Passed (502/502)
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Meter
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Verse 1
<lg n="1"> <l>कलाभ्यां चूडालंकृतशशिकलाभ्यां निजतपः-</l> <l>फलाभ्यां भक्तेषु प्रकटितफलाभ्यां भवतु मे ।</l> <l>शिवाभ्यामस्तोकत्रिभुवनशिवाभ्यां हृदि पुन-</l> <l>र्भवाभ्यामानन्दस्फुरदनुभवाभ्यां नतिरियम् ॥ १ ॥</l> </lg>
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Verse 8
<lg n="8"> <l>यथा बुद्धिः शुक्तौ रजतमिति काचाश्मनि मणि-</l> <l>र्जले पैष्टे क्षीरं भवति मृगतृष्णासु सलिलम् ।</l> <l>तथा देवभ्रान्त्या भजति भवदन्यं जडजनो</l> <l>महादेवेशं त्वां मनसि च न मत्वा पशुपते ॥ ८ ॥</l> </lg>
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Verse 13
<lg n="13"> <l>असारे संसारे निजभजनदूरे जडधिया</l> <l>भ्रमन्तं मामन्धं परमकृपया पातुमुचितम् ।</l> <l>मदन्यः को दीनस्तव कृपणरक्षातिनिपुण-</l> <l>स्त्वदन्यः को वा मे त्रिजगति शरण्यः पशुपते ॥ १३ ॥</l> </lg>
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Verse 16
<lg n="16"> <l>विरिञ्चिर्दीर्घायुर्भवतु भवता तत्परशिर-</l> <l>श्चतुष्कं संरक्ष्यं स खलु भुवि दैन्यं लिखितवान् ।</l> <l>विचारः को वा मां विशद कृपया पाति शिव ते</l> <l>कटाक्षव्यापारः स्वयमपि च दीनावनपरः ॥ १६ ॥</l> </lg>
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Verse 24
<lg n="24"> <l>कदा वा कैलासे कनकमणिसौधे सह गणै-</l> <l>र्वसञ्शंभोरग्रे स्फुटघटितमूर्धाञ्जलिपुटः ।</l> <l>विभो साम्ब स्वामिन्परमशिव पाहीति निगद-</l> <l>न्विधातॄणां कल्पान्क्षणमिव विनेष्यामि सुखतः ॥ २४ ॥</l> </lg>
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Verse 34
<lg n="34"> <l>किं ब्रूमस्तव साहसं पशुपते कस्यास्ति शंभो भव-</l> <l>द्धैर्यं चेदृशमात्मनः स्थितिरियं चान्यैः कथं लभ्यते ।</l> <l>बृश्यद्देवगणं त्रसन्मुनिगणं नश्यत्प्रपञ्चं लयं</l> <l>पश्यन्निर्भय एक एव विहरत्यानन्दसान्द्रो भवान् ॥</l> </lg>
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Verse 36
<lg n="36"> <l>भक्तो भक्तिगुणावृते मुदमृतापूर्णे प्रसन्ने मनः-</l> <l>कुम्भे साम्ब तवाङ्घ्रिपल्लवयुगं संस्थाप्य संवित्फलम् ।</l> <l>सत्त्वं मन्त्रमुदीरयन्निजशरीरागारशुद्धिं वह-</l> <l>न्पुण्याहं प्रकटीकरोमि रुचिरं कल्याणमापादयन् ॥</l> </lg>
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Verse 42
<lg n="42"> <l>गाम्भीर्यं परिखापदं घनधृतिः प्राकार उद्यद्गुण-</l> <l>स्तोमश्चाप्तबलं घनेन्द्रियचयो द्वाराणि देहे स्थितः ।</l> <l>विद्या वस्तुसमृद्धिरित्यखिलसामग्रीसमेते सदा</l> <l>दुर्गातिप्रियदेव मामकमनोदुर्गे निवासं कुरु ॥ ४२ ॥</l> </lg>
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दु
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Verse 43
<lg n="43"> <l>मा गच्छ त्वमितस्ततो गिरिश भो मय्येव वासं कुरु</l> <l>स्वामिन्नादिकिरात मामकमनःकान्तारसीमान्तरे ।</l> <l>वर्तन्ते बहुशो मृगा मदजुषो मात्सर्यमोहादय-</l> <l>स्तान्हत्वा मृगयाविनोदरुचितालाभं च संप्राप्स्यसि ॥</l> </lg>
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Verse 49
<lg n="49"> <l>आनन्दामृतपूरिता हरपदाम्भोजालवालोद्यता</l> <l>स्थैयों पनमुपेत्य भक्तिलतिका शाखोपशाखान्विता ।</l> <l>उच्चैर्मानसकायमान पटलीमाक्रम्य निष्कल्मषा</l> <l>नित्याभीष्टफलप्रदा भवतु मे सत्कर्मसंवर्धिता ॥ ४९ ॥</l> </lg>
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च्चै
G
|
र्मा
G
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न
L
|
स
L
|
का
G
|
य
L
|
मा
G
|
न
L
|
प
L
|
ट
L
|
ली
G
|
मा
G
|
क्र
G
|
म्य
L
|
नि
G
|
ष्क
G
|
ल्म
L
|
षा
G
|
|
नि
G
|
त्या
G
|
भी
G
|
ष्ट
L
|
फ
L
|
ल
G
|
प्र
L
|
दा
G
|
भ
L
|
व
L
|
तु
L
|
मे
G
|
स
G
|
त्क
G
|
र्म
L
|
सं
G
|
व
G
|
र्धि
L
|
ता
G
|
Verse 54
<lg n="54"> <l>संध्या घर्मदिनात्ययो हरिकराघातप्रभूतानक-</l> <l>ध्वानो वारिदगर्जितं दिविषदां दृष्टिच्छटा चञ्चला ।</l> <l>भक्तानां परितोषबाष्पविततिर्वृष्टिर्मयूरी शिवा</l> <l>यस्मिन्नुज्ज्वलताण्डवं विजयते तं नीलकण्ठं भजे ॥ ५४ ॥</l> </lg>
|
सं
G
|
ध्या
G
|
घ
G
|
र्म
L
|
दि
L
|
ना
G
|
त्य
L
|
यो
G
|
ह
L
|
रि
L
|
क
L
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रा
G
|
घा
G
|
त
G
|
प्र
L
|
भू
G
|
ता
G
|
न
L
|
क
L
|
|
ध्वा
G
|
नो
G
|
वा
G
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रि
L
|
द
L
|
ग
G
|
र्जि
L
|
तं
G
|
दि
L
|
वि
L
|
ष
L
|
दां
G
|
दृ
G
|
ष्टि
G
|
च्छ
L
|
टा
G
|
च
G
|
ञ्च
L
|
ला
G
|
|
भ
G
|
क्ता
G
|
नां
G
|
प
L
|
रि
L
|
तो
G
|
ष
L
|
बा
G
|
ष्प
L
|
वि
L
|
त
L
|
ति
G
|
र्वृ
G
|
ष्टि
G
|
र्म
L
|
यू
G
|
री
G
|
शि
L
|
वा
G
|
|
य
G
|
स्मि
G
|
न्नु
G
|
ज्ज्व
L
|
ल
L
|
ता
G
|
ण्ड
L
|
वं
G
|
वि
L
|
ज
L
|
य
L
|
ते
G
|
तं
G
|
नी
G
|
ल
L
|
क
G
|
ण्ठं
G
|
भ
L
|
जे
G
|
Verse 57
<lg n="57"> <l>नित्यं स्वोदरपूरणाय सकलानुद्दिश्य वित्ताशया</l> <l>व्यर्थं पर्यटनं करोमि भवतः सेवां न जाने विभो ।</l> <l>मज्जन्मान्तरपुण्यपाकबलतस्त्वं शर्व सर्वान्तर-</l> <l>स्तिष्ठस्येव हि तेन वा पशुपते ते रक्षणीयोऽस्म्यहम् ॥</l> </lg>
|
नि
G
|
त्यं
G
|
स्वो
G
|
द
L
|
र
L
|
पू
G
|
र
L
|
णा
G
|
य
L
|
स
L
|
क
L
|
ला
G
|
नु
G
|
द्दि
G
|
श्य
L
|
वि
G
|
त्ता
G
|
श
L
|
या
G
|
|
व्य
G
|
र्थं
G
|
प
G
|
र्य
L
|
ट
L
|
नं
G
|
क
L
|
रो
G
|
मि
L
|
भ
L
|
व
L
|
तः
G
|
से
G
|
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G
|
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L
|
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G
|
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G
|
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L
|
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G
|
|
म
G
|
ज्ज
G
|
न्मा
G
|
न्त
L
|
र
L
|
पु
G
|
ण्य
L
|
पा
G
|
क
L
|
ब
L
|
ल
L
|
त
G
|
स्त्वं
G
|
श
G
|
र्व
L
|
स
G
|
र्वा
G
|
न्त
L
|
र
L
|
|
स्ति
G
|
ष्ठ
G
|
स्ये
G
|
व
L
|
हि
L
|
ते
G
|
न
L
|
वा
G
|
प
L
|
शु
L
|
प
L
|
ते
G
|
ते
G
|
र
G
|
क्ष
L
|
णी
G
|
यो
G
|
स्म्य
L
|
हम्
L
|
Verse 58
<lg n="58"> <l>एको वारिजबान्धवः क्षितिनभोव्याप्तं तमोमण्डलं</l> <l>भित्त्वा लोचनगोचरोऽपि भवति त्वं कोटिसूर्यप्रभः ।</l> <l>वेद्यः किं न भवस्यहो घनतरं कीदृग्भवेन्मत्तम-</l> <l>स्तत्सर्वं व्यपनीय मे पशुपते साक्षात्प्रसन्नो भव ॥ ५८ ॥</l> </lg>
|
ए
G
|
को
G
|
वा
G
|
रि
L
|
ज
L
|
बा
G
|
न्ध
L
|
वः
G
|
क्षि
L
|
ति
L
|
न
L
|
भो
G
|
व्या
G
|
प्तं
G
|
त
L
|
मो
G
|
म
G
|
ण्ड
L
|
लं
G
|
|
भि
G
|
त्त्वा
G
|
लो
G
|
च
L
|
न
L
|
गो
G
|
च
L
|
रो
G
|
पि
L
|
भ
L
|
व
L
|
ति
G
|
त्वं
G
|
को
G
|
टि
L
|
सू
G
|
र्य
G
|
प्र
L
|
भः
G
|
|
वे
G
|
द्यः
G
|
किं
G
|
न
L
|
भ
L
|
व
G
|
स्य
L
|
हो
G
|
घ
L
|
न
L
|
त
L
|
रं
G
|
की
G
|
दृ
G
|
ग्भ
L
|
वे
G
|
न्म
G
|
त्त
L
|
म
L
|
|
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G
|
त्स
G
|
र्वं
G
|
व्य
L
|
प
L
|
नी
G
|
य
L
|
मे
G
|
प
L
|
शु
L
|
प
L
|
ते
G
|
सा
G
|
क्षा
G
|
त्प्र
L
|
स
G
|
न्नो
G
|
भ
L
|
व
L
|
Verse 67
<lg n="67"> <l>बहुविधपरितोषबाष्पपूर-</l> <l>स्फुटपुलकाङ्कितचारुभोगभूमिम् ।</l> <l>चिरपदफलकाङ्क्षिसेव्यमानां</l> <l>परमसदाशिवभावनां प्रपद्ये ॥ ६७ ॥</l> </lg>
|
ब
L
|
हु
L
|
वि
L
|
ध
L
|
प
L
|
रि
L
|
तो
G
|
ष
L
|
बा
G
|
ष्प
L
|
पू
G
|
र
L
|
|
|
स्फु
L
|
ट
L
|
पु
L
|
ल
L
|
का
G
|
ङ्कि
L
|
त
L
|
चा
G
|
रु
L
|
भो
G
|
ग
L
|
भू
G
|
मिम्
L
|
|
चि
L
|
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L
|
प
L
|
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L
|
फ
L
|
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L
|
का
G
|
ङ्क्षि
L
|
से
G
|
व्य
L
|
मा
G
|
नां
G
|
|
|
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|
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|
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|
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L
|
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G
|
शि
L
|
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L
|
भा
G
|
व
L
|
नां
G
|
प्र
L
|
प
G
|
द्ये
G
|
Verse 69
<lg n="69"> <l>जडता पशुता कलङ्किता</l> <l>कुटिलचरत्वं च नास्ति मयि देव ।</l> <l>अस्ति यदि राजमौले</l> <l>भवदाभरणस्य नास्मि किं पात्रम् ॥ ६९ ॥</l> </lg>
|
ज
L
|
ड
L
|
ता
G
|
प
L
|
शु
L
|
ता
G
|
क
L
|
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G
|
ङ्कि
L
|
ता
G
|
|||
|
कु
L
|
टि
L
|
ल
L
|
च
L
|
र
G
|
त्वं
G
|
च
L
|
ना
G
|
स्ति
L
|
म
L
|
यि
L
|
दे
G
|
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L
|
|
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G
|
स्ति
L
|
य
L
|
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L
|
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G
|
ज
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|
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G
|
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G
|
|||||
|
भ
L
|
व
L
|
दा
G
|
भ
L
|
र
L
|
ण
G
|
स्य
L
|
ना
G
|
स्मि
L
|
किं
G
|
पा
G
|
त्रम्
L
|
Verse 71
<lg n="71"> <l>आरूढभक्तिगुणकुञ्चितभावचाप-</l> <l>युक्तैः शिवस्मरणबाणगणैरभोधैः ।</l> <l>निर्जित्य किल्बिषरिपून्विजयी सुधीन्द्रः</l> <l>सानन्दमावहति सुस्थिरराजलक्ष्मीम् ॥ ७१ ॥</l> </lg>
|
आ
G
|
रू
G
|
ढ
L
|
भ
G
|
क्ति
L
|
गु
L
|
ण
L
|
कु
G
|
ञ्चि
L
|
त
L
|
भा
G
|
व
L
|
चा
G
|
प
L
|
|
यु
G
|
क्तैः
G
|
शि
L
|
व
G
|
स्म
L
|
र
L
|
ण
L
|
बा
G
|
ण
L
|
ग
L
|
णै
G
|
र
L
|
भो
G
|
धैः
G
|
|
नि
G
|
र्जि
G
|
त्य
L
|
कि
G
|
ल्बि
L
|
ष
L
|
रि
L
|
पू
G
|
न्वि
L
|
ज
L
|
यी
G
|
सु
L
|
धी
G
|
न्द्रः
G
|
|
सा
G
|
न
G
|
न्द
L
|
मा
G
|
व
L
|
ह
L
|
ति
L
|
सु
G
|
स्थि
L
|
र
L
|
रा
G
|
ज
L
|
ल
G
|
क्ष्मीम्
G
|
Verse 72
<lg n="72"> <l>ध्यानाञ्जनेन समवेक्ष्य तमःप्रदेश</l> <l>भित्त्वा महाबलिभिरीश्वरनाममन्त्रैः ।</l> <l>दिव्याश्रितं भुजगभूषणमुद्वहन्ति</l> <l>ये पादपद्ममिह ते शिव ते कृतार्थाः ॥ ७२ ॥</l> </lg>
|
ध्या
G
|
ना
G
|
ञ्ज
L
|
ने
G
|
न
L
|
स
L
|
म
L
|
वे
G
|
क्ष्य
L
|
त
L
|
मः
G
|
प्र
L
|
दे
G
|
श
L
|
|
भि
G
|
त्त्वा
G
|
म
L
|
हा
G
|
ब
L
|
लि
L
|
भि
L
|
री
G
|
श्व
L
|
र
L
|
ना
G
|
म
L
|
म
G
|
न्त्रैः
G
|
|
दि
G
|
व्या
G
|
श्रि
L
|
तं
G
|
भु
L
|
ज
L
|
ग
L
|
भू
G
|
ष
L
|
ण
L
|
मु
G
|
द्व
L
|
ह
G
|
न्ति
L
|
|
ये
G
|
पा
G
|
द
L
|
प
G
|
द्म
L
|
मि
L
|
ह
L
|
ते
G
|
शि
L
|
व
L
|
ते
G
|
कृ
L
|
ता
G
|
र्थाः
G
|
Verse 74
<lg n="74"> <l>आशापाशक्लेशदुर्वासनादि-</l> <l>भेदोद्युक्तैर्दिव्यगन्धैरमन्दैः ।</l> <l>आशाशाटीकस्य पादारविन्दं</l> <l>चेतःपेटीं वासितां मे तनोतु ॥ ७४ ॥</l> </lg>
|
आ
G
|
शा
G
|
पा
G
|
श
G
|
क्ले
G
|
श
L
|
दु
G
|
र्वा
G
|
स
L
|
ना
G
|
दि
L
|
|
भे
G
|
दो
G
|
द्यु
G
|
क्तै
G
|
र्दि
G
|
व्य
L
|
ग
G
|
न्धै
G
|
र
L
|
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G
|
न्दैः
G
|
|
आ
G
|
शा
G
|
शा
G
|
टी
G
|
क
G
|
स्य
L
|
पा
G
|
दा
G
|
र
L
|
वि
G
|
न्दं
G
|
|
चे
G
|
तः
G
|
पे
G
|
टीं
G
|
वा
G
|
सि
L
|
तां
G
|
मे
G
|
त
L
|
नो
G
|
तु
L
|
Verse 76
<lg n="76"> <l>भक्तिर्महेशपदपुष्करमावसन्ती</l> <l>कादम्बिनीव कुरुते परितोषवर्षम् ।</l> <l>संपूरितो भवति यस्य मनस्तटाक-</l> <l>स्तज्जन्मसस्यमखिलं सफलं च नान्यत् ॥ ७६ ॥</l> </lg>
|
भ
G
|
क्ति
G
|
र्म
L
|
हे
G
|
श
L
|
प
L
|
द
L
|
पु
G
|
ष्क
L
|
र
L
|
मा
G
|
व
L
|
स
G
|
न्ती
G
|
|
का
G
|
द
G
|
म्बि
L
|
नी
G
|
व
L
|
कु
L
|
रु
L
|
ते
G
|
प
L
|
रि
L
|
तो
G
|
ष
L
|
व
G
|
र्षम्
L
|
|
सं
G
|
पू
G
|
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L
|
तो
G
|
भ
L
|
व
L
|
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L
|
य
G
|
स्य
L
|
म
L
|
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|
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|
टा
G
|
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L
|
|
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|
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G
|
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|
स
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|
स्य
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|
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|
खि
L
|
लं
G
|
स
L
|
फ
L
|
लं
G
|
च
L
|
ना
G
|
न्यत्
L
|
Verse 77
<lg n="77"> <l>बुद्धिः स्थिरा भवितुमीश्वरपादपद्म-</l> <l>सक्ता वधूर्विरहिणीव सदा स्मरन्ती ।</l> <l>सद्भावनास्मरणदर्शनकीर्तनादि</l> <l>संमोहितेव शिवमन्त्रजपेन विन्त्ते ॥ ७७ ॥</l> </lg>
|
बु
G
|
द्धिः
G
|
स्थि
L
|
रा
G
|
भ
L
|
वि
L
|
तु
L
|
मी
G
|
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L
|
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|
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G
|
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|
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|
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L
|
|
स
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|
क्ता
G
|
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L
|
धू
G
|
र्वि
L
|
र
L
|
हि
L
|
णी
G
|
व
L
|
स
L
|
दा
G
|
स्म
L
|
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G
|
न्ती
G
|
|
स
G
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द्भा
G
|
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L
|
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G
|
स्म
L
|
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L
|
ण
L
|
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G
|
र्श
L
|
न
L
|
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|
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L
|
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|
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|
|
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G
|
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G
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L
|
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G
|
व
L
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शि
L
|
व
L
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म
G
|
न्त्र
L
|
ज
L
|
पे
G
|
न
L
|
वि
G
|
न्त्ते
G
|
Verse 79
<lg n="79"> <l>नित्यं योगिमनःसरोजदलसंचारक्षमस्त्वत्क्रमः</l> <l>शंभो तेन कथं कठोरयमराड्वक्षः कवाटक्षतिः ।</l> <l>अत्यन्तं मृदुलं त्वदङ्घ्रियुगलं हा मे मनश्चिन्तय-</l> <l>त्येतल्लोचनगोचरं कुरु विभो हस्तेन संवाहये ॥ ७९ ॥</l> </lg>
|
नि
G
|
त्यं
G
|
यो
G
|
गि
L
|
म
L
|
नः
G
|
स
L
|
रो
G
|
ज
L
|
द
L
|
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L
|
सं
G
|
चा
G
|
र
G
|
क्ष
L
|
म
G
|
स्त्व
G
|
त्क्र
L
|
मः
G
|
|
शं
G
|
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G
|
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G
|
न
L
|
क
L
|
थं
G
|
क
L
|
ठो
G
|
र
L
|
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L
|
म
L
|
रा
G
|
ड्व
G
|
क्षः
G
|
क
L
|
वा
G
|
ट
G
|
क्ष
L
|
तिः
G
|
|
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G
|
त्य
G
|
न्तं
G
|
मृ
L
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दु
L
|
लं
G
|
त्व
L
|
द
G
|
ङ्घ्रि
L
|
यु
L
|
ग
L
|
लं
G
|
हा
G
|
मे
G
|
म
L
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न
G
|
श्चि
G
|
न्त
L
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य
L
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त्ये
G
|
त
G
|
ल्लो
G
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च
L
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न
L
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गो
G
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च
L
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रं
G
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कु
L
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रु
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वि
L
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भो
G
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ह
G
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स्ते
G
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न
L
|
सं
G
|
वा
G
|
ह
L
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ये
G
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Verse 80
<lg n="80"> <l>एष्यत्येष जनिं मनोऽस्य कठिनं तस्मिन्नटानीति म-</l> <l>द्रक्षायै गिरिसीम्नि कोमलपदन्यासः पुराभ्यासितः ।</l> <l>नो चेद्दिव्यगृहान्तरेषु सुमनस्तल्पेषु वेद्यादिषु</l> <l>प्रायः सत्सु शिलातलेषु नटनं शंभो किमर्थं तव ॥</l> </lg>
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ए
G
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ष्य
G
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त्ये
G
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ष
L
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ज
L
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निं
G
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म
L
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नो
G
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स्य
L
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क
L
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ठि
L
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नं
G
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त
G
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स्मि
G
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न्न
L
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टा
G
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नी
G
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ति
L
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म
L
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द्र
G
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क्षा
G
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यै
G
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गि
L
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रि
L
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सी
G
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म्नि
L
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को
G
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म
L
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ल
L
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प
L
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द
G
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न्या
G
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सः
G
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पु
L
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रा
G
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भ्या
G
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सि
L
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तः
G
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नो
G
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चे
G
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द्दि
G
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व्य
L
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गृ
L
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हा
G
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न्त
L
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रे
G
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षु
L
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सु
L
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म
L
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न
G
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स्त
G
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ल्पे
G
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षु
L
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वे
G
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द्या
G
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दि
L
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षु
G
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प्रा
G
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यः
G
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स
G
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त्सु
L
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शि
L
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ला
G
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त
L
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ले
G
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षु
L
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न
L
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ट
L
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नं
G
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शं
G
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भो
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कि
L
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म
G
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र्थं
G
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त
L
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व
L
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Verse 88
<lg n="88"> <l>यदा कृताम्भोनिधिसेतुबन्धनः</l> <l>करस्थलाधःकृतपर्वताधिपः ।</l> <l>भवानि ते लङ्घितपद्मसंभव-</l> <l>स्तदा शिवार्चस्तवभावनक्षमः ॥ ८८ ॥</l> </lg>
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य
L
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दा
G
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कृ
L
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ता
G
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म्भो
G
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नि
L
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धि
L
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से
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तु
L
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ब
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न्ध
L
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नः
G
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क
L
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र
G
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स्थ
L
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ला
G
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धः
G
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कृ
L
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त
L
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प
G
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र्व
L
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ता
G
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धि
L
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पः
G
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भ
L
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वा
G
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नि
L
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ते
G
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ल
G
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ङ्घि
L
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त
L
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प
G
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द्म
L
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सं
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भ
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व
L
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स्त
L
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दा
G
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शि
L
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वा
G
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र्च
G
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स्त
L
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व
L
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भा
G
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व
L
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न
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क्ष
L
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मः
G
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Verse 92
<lg n="92"> <l>दूरीकृतानि दुरितानि दुरक्षराणि</l> <l>दौर्भाग्यदुःखदुरहंकृतिदुर्वचांसि ।</l> <l>सारं त्वदीयचरितं नितरां पिबन्तं</l> <l>गौरीश मामिह समुद्धर सत्कटाक्षैः ॥ ९२ ॥</l> </lg>
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दू
G
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री
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कृ
L
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ता
G
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नि
L
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दु
L
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रि
L
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ता
G
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नि
L
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दु
L
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र
G
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क्ष
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रा
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णि
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दौ
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र्भा
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ग्य
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दुः
G
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ख
L
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दु
L
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र
L
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हं
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कृ
L
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ति
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दु
G
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र्व
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चां
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सि
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सा
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रं
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त्व
L
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दी
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य
L
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च
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रि
L
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तं
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नि
L
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त
L
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रां
G
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पि
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ब
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न्तं
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गौ
G
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री
G
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श
L
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मा
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मि
L
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ह
L
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स
L
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मु
G
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द्ध
L
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र
L
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स
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त्क
L
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टा
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क्षैः
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Verse 100
<lg n="100"> <l>स्तोत्रेणालमहं प्रवच्मि न मृषा देवा विरिञ्चादयः</l> <l>स्तुत्यानां गणनाप्रसङ्गसमये त्वामग्रगण्यं विदुः ।</l> <l>माहात्म्याग्रिविचारणप्रकरणे धानातुषस्तोमव-</l> <l>द्धूतास्त्वां विदुरुत्तमोत्तमफलं शंभो भवत्सेवकाः ॥</l> </lg>
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स्तो
G
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त्रे
G
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णा
G
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ल
L
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म
L
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हं
G
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प्र
L
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व
G
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च्मि
L
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न
L
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मृ
L
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षा
G
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दे
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वा
G
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वि
L
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रि
G
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ञ्चा
G
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द
L
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यः
G
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स्तु
G
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त्या
G
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नां
G
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ग
L
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ण
L
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ना
G
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प्र
L
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स
G
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ङ्ग
L
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स
L
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म
L
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ये
G
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त्वा
G
|
म
G
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ग्र
L
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ग
G
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ण्यं
G
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वि
L
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दुः
G
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मा
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हा
G
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त्म्या
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ग्रि
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वि
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चा
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र
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ण
G
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प्र
L
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क
L
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र
L
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णे
G
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धा
G
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ना
G
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तु
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ष
G
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स्तो
G
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म
L
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व
L
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द्धू
G
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ता
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स्त्वां
G
|
वि
L
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दु
L
|
रु
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त्त
L
|
मो
G
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त्त
L
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म
L
|
फ
L
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लं
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|
शं
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भो
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भ
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व
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त्से
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व
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काः
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