Reports » शिवकेशादिपादान्तवर्णनस्तोत्रम्
Updated 2026-03-05 03:26
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Text
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Meter
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Verse 1
<lg n="1"> <l>देयासुर्मूर्ध्नि राजत्सरससुरसरित्पारपर्यन्तनिर्य-</l> <l>त्प्रांशुस्तम्बाः पिशङ्गास्तुलितपरिणतारक्तशालीलता वः ।</l> <l>दुर्वारापत्तिगर्तश्रितनिखिलजनोत्तारणे रज्जुभूता</l> <l>घोराघोर्वीरुहालीदहनशिखिशिखाः शर्म शार्वाः कपर्दाः ॥</l> </lg>
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Verse 2
<lg n="2"> <l>कुर्वन्निर्वाणमार्गप्रगमपरिलसद्रूप्यसोपानशङ्कां</l> <l>शक्रारीणां पुराणां त्रयविजयकृतस्पष्टरेखायमाणम् ।</l> <l>अव्यादव्याजमुच्चैरलिकहिमधराधित्यकान्तस्त्रिधोद्य-</l> <l>ज्जाह्नव्याभं मृडानीकमितुरुडुपरुक्पाण्डरं वस्त्रिपुण्ड्रम् ॥</l> </lg>
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Verse 6
<lg n="6"> <l>चण्डीवक्त्रार्पणेच्छोस्तदनु भगवतः पाण्डुरुक्पाण्डुगण्ड-</l> <l>प्रोद्यत्कण्डूं विनेतुं वितनुत इव ये रत्नकोणैर्विघृष्टिम् ।</l> <l>चण्डार्चिर्मण्डलाभे सततनतजनध्वान्तखण्डातिशौण्डे</l> <l>चण्डीशे ते श्रिये स्तामधिकमवनताखण्डले कुण्डले वः ॥</l> </lg>
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Verse 7
<lg n="7"> <l>खट्वाङ्गोदप्रपाणेः स्फुटविकटपुटो वक्त्ररन्ध्रप्रवेश-</l> <l>प्रेप्सूदञ्चत्फणोरुश्वसदतिधवलाहीन्द्रशङ्कां दधानः ।</l> <l>युष्माकं कम्रवक्त्राम्बुरुहपरिलसत्कर्णिकाकारशोभः</l> <l>शश्वत्त्राणाय भूयादलमतिविमलोत्तुङ्गकोणः स घोणः ॥</l> </lg>
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Verse 9
<lg n="9"> <l>यो भासा भात्युपान्तस्थित इव निभृतं कौस्तुभो द्रष्टुमिच्छ-</l> <l>न्सोत्थस्नेहान्नितान्तं गलगतगरलं पत्युरुच्चैः पशूनाम् ।</l> <l>प्रोद्यत्प्रेम्णा यमार्द्रा पिबति गिरिसुता संपदः सातिरेका</l> <l>लोकाः शोणीकृतान्ता यदधरमहसा सोऽधरो वो विधत्ताम् ॥</l> </lg>
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Verse 12
<lg n="12"> <l>भासा यस्य त्रिलोकी लसति परिलसत्फेनबिन्द्वर्णवान्त-</l> <l>र्व्यामग्नेवातिगौरस्तुलितसुरसरिद्वारिपूरप्रसारः ।</l> <l>पीनात्मा दन्तभाभिर्भृशमहहहकारातिभीमः सदेष्टां</l> <l>पुष्टां तुष्टिं कृषीष्ट स्फुटमिह भवतामट्टहासोऽष्टमूर्तेः ॥</l> </lg>
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Verse 16
<lg n="16"> <l>प्रौढप्रेमाकुलाया दृढतरपरिरम्भेषु पर्वेन्दुमुख्याः</l> <l>पार्वत्याश्चारुचामीकरवलयपदैरङ्कितं कान्तिशालि ।</l> <l>रङ्गन्नागाङ्गदाढ्यं सततमविहितं कर्म निर्मूलयेत्त-</l> <l>द्दोर्मूलं निर्मलं यद्धृदि दुरितमपास्यार्जितं धूर्जटेर्वः ॥</l> </lg>
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लं
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र्ज
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Verse 19
<lg n="19"> <l>मुक्तामुक्ते विचित्राकुलवलिलहरीजालशालिन्यवाञ्च-</l> <l>न्नाभ्यावर्ते विलोलद्भुजगवरयुते कालशत्रोर्विशाले</l> <l>युष्मच्चित्तत्रिधामा प्रतिनवरुचिरे मन्दिरे कान्तिलक्ष्म्याः</l> <l>शेतां शीतांशुगौरे चिरतरमुदरक्षीरसिन्धौ सलीलम् ॥</l> </lg>
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त्रा
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Verse 20
<lg n="20"> <l>वैयाघ्नी यत्र कृत्तिः स्फुरति हिमगिरेर्विस्तृतोपत्यकान्तः</l> <l>सान्द्रावश्यायमिश्रा परित इव वृता नीलजीमूतमाला ।</l> <l>आबद्धाहीन्द्रकाञ्चीगुणमतिपृथुलं शैलजाक्रीडभूमि-</l> <l>स्तद्वो निःश्रेयसे स्याज्जघनमतिघनं बालशीतांशुमौलेः ॥</l> </lg>
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वै
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या
G
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घ्नी
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य
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त्र
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कृ
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त्तिः
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स्फु
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र
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ति
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हि
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म
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गि
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रे
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र्वि
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स्तृ
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तो
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प
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त्य
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का
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न्तः
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सा
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न्द्रा
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व
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श्या
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य
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मि
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श्रा
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प
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रि
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त
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इ
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व
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वृ
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ता
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नी
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ल
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जी
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मू
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त
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मा
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ला
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आ
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ब
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द्धा
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ही
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न्द्र
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का
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ञ्ची
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गु
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ण
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म
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ति
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पृ
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थु
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लं
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शै
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ल
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जा
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क्री
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ड
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भू
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मि
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स्त
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द्वो
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निः
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श्रे
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य
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से
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स्या
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ज्ज
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घ
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न
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म
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ति
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घ
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नं
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बा
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ल
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शी
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तां
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शु
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मौ
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लेः
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Verse 23
<lg n="23"> <l>मञ्जीरीभूतभोगिप्रवरगणफणामण्डलान्तर्नितान्त-</l> <l>व्यादीर्घानर्घरत्नद्युतिकिसलयिते स्तूयमाने द्युसद्भिः ।</l> <l>बिभ्रत्यौ विभ्रमं वः स्फटिकमणिबृहद्दण्डवद्भासिते ये</l> <l>जङ्घे शङ्खेन्दुशुभ्रे भृशमिह भवतां मानसे शूलपाणेः ॥</l> </lg>
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म
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ञ्जी
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री
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भू
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त
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भो
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गि
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प्र
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व
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र
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ग
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ण
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फ
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णा
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म
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ण्ड
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ला
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न्त
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र्नि
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ता
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न्त
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व्या
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दी
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र्घा
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न
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र्घ
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र
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त्न
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द्यु
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ति
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कि
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स
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ल
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यि
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स्तू
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य
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मा
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ने
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द्यु
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स
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द्भिः
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बि
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भ्र
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त्यौ
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वि
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भ्र
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मं
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वः
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स्फ
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टि
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क
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म
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णि
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बृ
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ह
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द्द
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ण्ड
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व
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द्भा
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सि
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ते
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ज
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ङ्घे
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श
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ङ्खे
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न्दु
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शु
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भ्रे
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भृ
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श
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मि
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ह
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भ
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व
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तां
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मा
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न
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से
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शू
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ल
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पा
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णेः
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Verse 25
<lg n="25"> <l>याः स्वस्यैकांशपातादतिबलहगलद्रक्तवक्त्रं प्रणुन्न-</l> <l>प्राणं प्राक्रोशयन्प्राङ् निजमचलवरं चालयन्तं दशास्यम् ।</l> <l>पादाङ्गुल्यो दिशन्तु द्रुतमयुगदृशः कल्मषप्लोषकल्याः</l> <l>कल्याणं फुल्लमाल्यप्रकरविलसिता वः प्रणद्धाहिवल्ल्यः ॥</l> </lg>
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याः
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स्व
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स्यै
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कां
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श
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पा
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ता
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ल
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ह
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ग
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ल
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द्र
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क्त
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व
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क्त्रं
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प्र
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णु
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न्न
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प्रा
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प्रा
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क्रो
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य
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न्प्रा
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ज
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म
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च
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ल
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व
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रं
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चा
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ल
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य
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न्तं
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द
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शा
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स्यम्
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पा
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दा
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ङ्गु
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ल्यो
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दि
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श
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न्तु
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द्रु
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त
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म
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यु
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ग
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दृ
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शः
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क
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ल्म
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ष
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प्लो
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ष
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क
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ल्याः
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क
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ल्या
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णं
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फु
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ल्ल
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मा
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ल्य
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प्र
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क
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र
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वि
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ल
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सि
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ता
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वः
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प्र
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ण
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द्धा
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हि
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व
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Verse 26
<lg n="26"> <l>प्रह्वप्राचीनबर्हिः प्रमुखसुरवरप्रस्फुरन्मौलिसक्त-</l> <l>ज्यायोरत्नोत्करोस्रैरविरतममला भूरिनीराजिता या ।</l> <l>प्रोदग्राग्रा प्रदेयात्ततिरिव रुचिरा तारकाणां नितान्तं</l> <l>नीलग्रीवस्य पादाम्बुरुहविलसिता सा नखाली सुखं वः ॥</l> </lg>
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प्र
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प्रा
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मु
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र
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त
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म
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म
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ला
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ग्रा
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त्त
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रि
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रा
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र
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णां
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ता
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न्तं
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नी
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ग्री
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स्य
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म्बु
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वि
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ता
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सा
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