Reports » नीलरुद्रोपनिषत्
Updated 2026-02-27 02:21
XML
XML conforms to the TEI schema ✓ Passed (33/33)
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All <div> elements set 'n' with unique values ✓ Passed (3/3)
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Verse-only texts: <lg> slugs do not contain 'lg' — N/A (0/0)
Text
Devanagari text is well-formed ⚠ Partial (80/81)
Unexpected character ':' in text <प्रथम: खण्ड:>
<head n="1.head1">प्रथम: खण्ड:</head>
No leading or trailing spaces in text elements ✓ Passed (48/48)
Verse numbers match `n` attribute ✗ Failed (0/2)
Verse number mismatch. (expected 'lg9', saw '1')
<lg n="1.lg9"> <l>असौ यस्ताम्रो अरुण उत बभ्रुर्विलोहितः ।</l> <l>ये चेमे रुद्रा अभितो दिक्षु श्रिताः सहस्रशोऽवैषां हेड ईमहे ॥ १ ॥</l> </lg>
Verse number mismatch. (expected 'lg11', saw '2')
<lg n="2.lg11"> <l>या इषवो यातुधानानां ये वा वनस्पतीनाम् ।</l> <l>ये वाऽवटेषु शेरते तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥ २ ॥</l> </lg>
Meter
All verses have a known meter ⚠ Partial (4/23)
Verse 1.lg2
<lg n="1.lg2"> <l>दिव उग्रोऽवारुक्षत् प्रत्यस्थाद्भूम्यामधि ।</l> <l>जनासः पश्यतेमं नीलग्रीवं विलोहितम् ॥</l> </lg>
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नी
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Verse 1.lg3
<lg n="1.lg3"> <l>एष एत्यवीरहा रुद्रो जलासभेषजीः ।</l> <l>वित्तेऽक्षेममनीनशद्वातीकारोऽप्येतु ते ॥</l> </lg>
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ए
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रु
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त्ते
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म
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<lg n="1.lg5"> <l>यामिषं गिरिशन्त हस्ते बिभर्ष्यस्तवे ।</l> <l>शिवां गिरित्र तां कुरु मा हिꣳसीः पुरुषं जगत् ॥</l> </lg>
Verse 1.lg6
<lg n="1.lg6"> <l>शिवेन वचसा त्वा गिरिशाच्छा वदामसि ।</l> <l>यथा नः सर्वमिज्जगदयक्ष्मं सुमना असत् ॥</l> </lg>
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क्ष्मं
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सु
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म
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ना
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अ
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सत्
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Verse 1.lg8
<lg n="1.lg8"> <l>या ते रुद्र शिवा तनूरघोराऽपापकाशिनी ।</l> <l>तया नस्तन्वा शंतमया गिरिशन्ताभिचाकशत् ॥</l> </lg>
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रु
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न्ता
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Verse 1.lg9
<lg n="1.lg9"> <l>असौ यस्ताम्रो अरुण उत बभ्रुर्विलोहितः ।</l> <l>ये चेमे रुद्रा अभितो दिक्षु श्रिताः सहस्रशोऽवैषां हेड ईमहे ॥ १ ॥</l> </lg>
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श्रि
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ताः
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Verse 2.lg1
<lg n="2.lg1"> <l>अपश्यं त्वावरोहन्तं नीलग्रीवं विलोहितम् ।</l> <l>उत त्वा गोपा अदृशन्नुत त्वोदहार्यः ॥</l> </lg>
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न्नु
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त
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द
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Verse 2.lg2
<lg n="2.lg2"> <l>उत त्वा विश्वा भूतानि तस्मै दृष्टाय ते नमः ।</l> <l>नमो अस्तु नीलशिखण्डाय सहस्राक्षाय वाजिने ॥</l> </lg>
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स
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स्रा
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क्षा
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य
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वा
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जि
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ने
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Verse 2.lg3
<lg n="2.lg3"> <l>अथो ये अस्य सत्वानस्तेभ्योऽहमकरं नमः ।</l> <l>नमांसि त आयुधायानातताय धृष्णवे ॥</l> </lg>
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धृ
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ष्ण
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Verse 2.lg4
<lg n="2.lg4"> <l>उभाभ्यामकरं नमो बाहुभ्यां तव धन्वने ।</l> <l>प्रमुञ्च धन्वनस्त्वमुभयोरार्त्नियोर्ज्याम् ॥</l> </lg>
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क
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G
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यो
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<lg n="2.lg5">
<l>या<choice>
<sic> </sic>
<corr/>
</choice>श्च ते हस्त इषवः परा ता भगवो वप ।</l>
<l>अवतत्य धनुस्त्वꣳ सहस्राक्ष शतेषुवे ॥</l>
</lg>
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<lg n="2.lg6"> <l>निशीर्य शल्यानां मुखा शिवो नः शंभुराभर ।</l> <l>विज्यं धनुः शिखण्डिनो विशल्यो बाणवाꣳ उत ॥</l> </lg>
Verse 2.lg7
<lg n="2.lg7"> <l>अनेशन्नस्येषव आभुरस्य निषङ्गथिः ।</l> <l>परि ते धन्वनो हेतिरस्मान्वृणक्तु विश्वतः ॥</l> </lg>
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G
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क्तु
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तः
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Verse 2.lg8
<lg n="2.lg8"> <l>अथो य इषुधिस्तवारे अस्मिन्निधेहि तम् ।</l> <l>या ते हेतिर्मीढुष्टम हस्ते बभूव ते धनुः ॥</l> </lg>
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अ
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G
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ढु
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ष्ट
L
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म
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ह
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ब
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व
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ते
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ध
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नुः
G
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Verse 2.lg9
<lg n="2.lg9"> <l>तया त्वं विश्वतो अस्मानयक्ष्मया परिब्भुज ।</l> <l>नमो अस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु ॥</l> </lg>
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त
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या
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त्वं
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वि
G
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स्मा
G
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न
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G
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पृ
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Verse 2.lg10
<lg n="2.lg10"> <l>ये अन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ।</l> <l>ये वाभिरोचने दिवि ये च सूर्यस्य रश्मिषु ॥</l> </lg>
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ये
G
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अ
G
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न्त
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रि
G
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क्षे
G
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ये
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G
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L
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G
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र्य
G
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स्य
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र
G
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श्मि
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षु
L
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Verse 2.lg11
<lg n="2.lg11"> <l>या इषवो यातुधानानां ये वा वनस्पतीनाम् ।</l> <l>ये वाऽवटेषु शेरते तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥ २ ॥</l> </lg>
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या
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|
ते
G
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भ्यः
G
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स
G
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र्पे
G
|
भ्यो
G
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न
L
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मः
G
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Verse 3.lg1
<lg n="3.lg1"> <l>यः स्वजनान्नीलग्रीवो यः स्वजनान्हरिः ।</l> <l>कल्माषपुच्छमोषधे जम्भयोताश्वरुन्धति ॥</l> </lg>
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यः
G
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स्व
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ज
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न्नी
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ग्री
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वो
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यः
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स्व
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ना
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L
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रिः
G
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क
G
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ल्मा
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ष
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पु
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च्छ
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मो
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ष
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धे
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म्भ
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यो
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ता
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श्व
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रु
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न्ध
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ति
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Verse 3.lg3
<lg n="3.lg3"> <l>विरूपाक्षेण बभ्रुणा वाचं वदिष्यतो हतः ।</l> <l>शर्व नीलशिखण्ड वीर कर्मणि कर्मणि ॥</l> </lg>
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वि
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रू
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क्षे
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भ्रु
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णा
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चं
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दि
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ष्य
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तो
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ह
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तः
G
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श
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र्व
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नी
G
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ल
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शि
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ख
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ण्ड
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वी
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