Reports » लघुवाक्यवृत्तिः
Updated 2026-03-06 03:48
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Text
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Meter
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Verse 2
<lg n="2"> <l>अज्ञानं कारणं साक्षी</l> <l>बोधस्तेषां विभासकः ।</l> <l>बोधाभासो बुद्धिगतः</l> <l>कर्ता स्यात्पुण्यपापयोः ॥ २ ॥</l> </lg>
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ज्ञा
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त्पु
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ण्य
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पा
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प
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योः
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Verse 3
<lg n="3"> <l>स एव संसरेत्कर्म-</l> <l>वशाल्लोकद्वये सदा ।</l> <l>बोधाभासाच्छुद्धबोधं</l> <l>विविच्यादतियत्नतः ॥ ३ ॥</l> </lg>
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स
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ए
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स
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रे
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त्क
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र्म
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व
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शा
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ल्लो
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क
G
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द्व
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ये
G
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स
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दा
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बो
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धा
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भा
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सा
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च्छु
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द्ध
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बो
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धं
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वि
L
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वि
G
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च्या
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द
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ति
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य
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त्न
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तः
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Verse 4
<lg n="4"> <l>जागरस्वप्नयोरेव</l> <l>बोधाभासविडम्बना ।</l> <l>सुप्तौ तु तल्लये बोधः</l> <l>शुद्धो जाड्यं प्रकाशयेत् ॥ ४ ॥</l> </lg>
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जा
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ग
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र
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स्व
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प्न
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यो
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रे
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व
L
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बो
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धा
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भा
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स
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वि
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ड
G
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म्ब
L
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ना
G
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सु
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प्तौ
G
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तु
L
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त
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ल्ल
L
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ये
G
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बो
G
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धः
G
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शु
G
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द्धो
G
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जा
G
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ड्यं
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प्र
L
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का
G
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श
L
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येत्
G
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Verse 5
<lg n="5"> <l>जागरेऽपि धियस्तूष्णीं-</l> <l>भावः शुद्धेन भास्यते ।</l> <l>धीव्यापाराश्च चिद्भास्या-</l> <l>श्चिदाभासेन संयुताः ॥ ५ ॥</l> </lg>
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जा
G
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ग
L
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रे
G
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पि
L
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धि
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य
G
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स्तू
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ष्णीं
G
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भा
G
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वः
G
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शु
G
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द्धे
G
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न
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भा
G
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स्य
L
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ते
G
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धी
G
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व्या
G
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पा
G
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रा
G
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श्च
L
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चि
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द्भा
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स्या
G
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श्चि
L
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दा
G
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भा
G
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से
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न
L
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सं
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यु
L
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ताः
G
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Verse 7
<lg n="7"> <l>रूपादौ गुणदोषादि-</l> <l>विकल्प्रा बुद्धिगाः क्रियाः ।</l> <l>ताः क्रिया विषयैः सार्धं</l> <l>भासयन्ती चितिर्मता ॥ ७ ॥</l> </lg>
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रू
G
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पा
G
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दौ
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गु
L
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ण
L
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दो
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षा
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दि
L
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वि
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क
G
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ल्प्रा
G
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बु
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द्धि
L
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गाः
G
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क्रि
L
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याः
G
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ताः
G
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क्रि
L
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या
G
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वि
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ष
L
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यैः
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सा
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र्धं
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भा
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स
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य
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न्ती
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चि
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ति
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र्म
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ता
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Verse 8
<lg n="8"> <l>रूपाच्च गुणदोषाभ्यां</l> <l>विविक्ता केवला चितिः ।</l> <l>सैवानुवर्तते रूप-</l> <l>रसादीनां विकल्पने ॥ ८ ॥</l> </lg>
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रू
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पा
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च्च
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गु
L
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ण
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दो
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षा
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भ्यां
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वि
L
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वि
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क्ता
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के
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ला
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चि
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तिः
G
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सै
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वा
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नु
L
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व
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र्त
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ते
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रू
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प
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र
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सा
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दी
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नां
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वि
L
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क
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ल्प
L
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ने
G
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Verse 9
<lg n="9"> <l>क्षणे क्षणेऽन्यथाभूता</l> <l>धीविकल्पाश्चितिर्न तु ।</l> <l>मुक्तासु सूत्रवद्बुद्धि-</l> <l>विकल्पेषु चितिस्तथा ॥ ९ ॥</l> </lg>
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क्ष
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णे
G
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क्ष
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णे
G
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न्य
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था
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भू
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ता
G
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धी
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वि
L
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क
G
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ल्पा
G
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श्चि
L
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ति
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र्न
L
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तु
L
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मु
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क्ता
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सु
L
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सू
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त्र
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व
G
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द्बु
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द्धि
L
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वि
L
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क
G
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ल्पे
G
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षु
L
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चि
L
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ति
G
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स्त
L
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था
G
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Verse 11
<lg n="11"> <l>नष्टे पूर्वविकल्पे तु</l> <l>यावदन्यस्य नोदयः ।</l> <l>निर्विकल्पकचैतन्यं</l> <l>स्पष्टं तावद्विभासते ॥ ११ ॥</l> </lg>
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न
G
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ष्टे
G
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पू
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र्व
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वि
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क
G
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ल्पे
G
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तु
L
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या
G
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व
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द
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न्य
G
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स्य
L
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नो
G
|
द
L
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यः
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नि
G
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र्वि
L
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क
G
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ल्प
L
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क
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चै
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त
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न्यं
G
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स्प
G
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ष्टं
G
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ता
G
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व
G
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द्वि
L
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भा
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स
L
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ते
G
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Verse 12
<lg n="12"> <l>एकद्वित्रिक्षणेष्वेवं</l> <l>विकल्पस्य निरोधनम् ।</l> <l>क्रमेणाभ्यस्यतां यत्ना-</l> <l>द्ब्रह्मानुभवकाङ्क्षिभिः ॥ १२ ॥</l> </lg>
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ए
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क
G
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द्वि
G
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त्रि
G
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क्ष
L
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णे
G
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ष्वे
G
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वं
G
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वि
L
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क
G
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ल्प
G
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स्य
L
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नि
L
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रो
G
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ध
L
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नम्
L
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क्र
L
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मे
G
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णा
G
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भ्य
G
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स्य
L
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तां
G
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य
G
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त्ना
G
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द्ब्र
G
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ह्मा
G
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नु
L
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भ
L
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व
L
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का
G
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ङ्क्षि
L
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भिः
G
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Verse 13
<lg n="13"> <l>सविकल्पकजीवोऽयं</l> <l>ब्रह्म तन्निर्विकल्पकम् ।</l> <l>अहं ब्रह्मेति वाक्येन</l> <l>सोऽयमर्थोऽभिधीयते ॥ १३ ॥</l> </lg>
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स
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वि
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क
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ल्प
L
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क
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जी
G
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वो
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यं
G
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ब्र
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ह्म
L
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त
G
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न्नि
G
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र्वि
L
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क
G
|
ल्प
L
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कम्
L
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अ
L
|
हं
G
|
ब्र
G
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ह्मे
G
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ति
L
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वा
G
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क्ये
G
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न
L
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|
सो
G
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य
L
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म
G
|
र्थो
G
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भि
L
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धी
G
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य
L
|
ते
G
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Verse 14
<lg n="14"> <l>सविकल्पकचिद्योऽहं</l> <l>ब्रह्मैकं निर्विकल्पकम् ।</l> <l>स्वतःसिद्धा विकल्पास्ते</l> <l>निरोद्धव्याः प्रयत्नतः ॥ १४ ॥</l> </lg>
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स
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वि
L
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क
G
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ल्प
L
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क
L
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चि
G
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द्यो
G
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हं
G
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|
ब्र
G
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ह्मै
G
|
कं
G
|
नि
G
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र्वि
L
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क
G
|
ल्प
L
|
कम्
L
|
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स्व
L
|
तः
G
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सि
G
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द्धा
G
|
वि
L
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क
G
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ल्पा
G
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स्ते
G
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|
नि
L
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रो
G
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द्ध
G
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व्याः
G
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प्र
L
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य
G
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त्न
L
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तः
G
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Verse 15
<lg n="15"> <l>शक्यः सर्वनिरोधेन</l> <l>समाधिर्योगिनां प्रियः ।</l> <l>तदशक्तौ क्षणं रुद्ध्वा</l> <l>श्रद्धालुर्ब्रह्मतात्मनः ॥ १५ ॥</l> </lg>
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श
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क्यः
G
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स
G
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र्व
L
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नि
L
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रो
G
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धे
G
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न
L
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स
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मा
G
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धि
G
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र्यो
G
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गि
L
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नां
G
|
प्रि
L
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यः
G
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त
L
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द
L
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श
G
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क्तौ
G
|
क्ष
L
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णं
G
|
रु
G
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द्ध्वा
G
|
|
श्र
G
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द्धा
G
|
लु
G
|
र्ब्र
G
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ह्म
L
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ता
G
|
त्म
L
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नः
G
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Verse 16
<lg n="16"> <l>श्रद्धालुर्ब्रह्मतां स्वस्य</l> <l>चिन्तयेद्बुद्धिवृत्तिभिः ।</l> <l>वाक्यवृत्त्या यथाशक्ति</l> <l>ज्ञात्वाद्धाभ्यम्यतां सदा ॥ १६ ॥</l> </lg>
|
श्र
G
|
द्धा
G
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लु
G
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र्ब्र
G
|
ह्म
L
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तां
G
|
स्व
G
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स्य
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चि
G
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न्त
L
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ये
G
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द्बु
G
|
द्धि
L
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वृ
G
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त्ति
L
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भिः
G
|
|
वा
G
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क्य
L
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वृ
G
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त्त्या
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य
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था
G
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श
G
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क्ति
G
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ज्ञा
G
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त्वा
G
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द्धा
G
|
भ्य
G
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म्य
L
|
तां
G
|
स
L
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दा
G
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Verse 17
<lg n="17"> <l>तच्चिन्तनं तत्कथन-</l> <l>मन्योन्यं तत्प्रबोधनम् ।</l> <l>एतदेकपरत्वं च</l> <l>ब्रह्माभ्यासं विदुर्बुधाः ॥ १७ ॥</l> </lg>
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त
G
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च्चि
G
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न्त
L
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नं
G
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त
G
|
त्क
L
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थ
L
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न
L
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म
G
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न्यो
G
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न्यं
G
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त
G
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त्प्र
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बो
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ध
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नम्
L
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ए
G
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त
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दे
G
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क
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प
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र
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त्वं
G
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च
G
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ब्र
G
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ह्मा
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भ्या
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सं
G
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वि
L
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दु
G
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र्बु
L
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धाः
G
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Verse 18
<lg n="18"> <l>देहात्मधीवद्ब्रह्मात्म-</l> <l>धदार्ढ्ये कृतकृत्यता ।</l> <l>यदा तदायं म्रियतां</l> <l>मुक्तोऽसौ नात्र संशयः ॥ १८ ॥</l> </lg>
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दे
G
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हा
G
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त्म
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धी
G
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व
G
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द्ब्र
G
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ह्मा
G
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त्म
L
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ध
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दा
G
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र्ढ्ये
G
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कृ
L
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त
L
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कृ
G
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त्य
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ता
G
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य
L
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दा
G
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त
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दा
G
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यं
G
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म्रि
L
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य
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तां
G
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मु
G
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क्तो
G
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सौ
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ना
G
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त्र
L
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सं
G
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श
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यः
G
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