Reports » हरिस्तुतिः

Updated 2026-03-01 06:25

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Text

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Meter

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Verse 2
<lg n="2">
  <l>यस्यैकांशादित्थमशेषं जगदेत-</l>
  <l>त्प्रादुर्भूतं येन पिनद्धं पुनरित्थम् ।</l>
  <l>येन व्याप्तं येन विबुद्धं सुखदुःखै-</l>
  <l>स्तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ २ ॥</l>
</lg>
G
स्यै
G
कां
G
शा
G
दि
G
त्थ
L
L
शे
G
षं
G
L
L
दे
G
L
त्प्रा
G
दु
G
र्भू
G
तं
G
ये
G
L
पि
L
G
द्धं
G
पु
L
L
रि
G
त्थम्
L
ये
G
G
व्या
G
प्तं
G
ये
G
L
वि
L
बु
G
द्धं
G
सु
L
L
दुः
G
खै
G
स्तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 3
<lg n="3">
  <l>सर्वज्ञो यो यश्च हि सर्वः सकलो यो</l>
  <l>यश्चानन्दोऽनन्तगुणो यो गुणधामा ।</l>
  <l>यश्चाव्यक्तो व्यस्तसमस्तः सदसद्य-</l>
  <l>स्तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ ३ ॥</l>
</lg>
G
र्व
G
ज्ञो
G
यो
G
G
श्च
L
हि
L
G
र्वः
G
L
L
लो
G
यो
G
G
श्चा
G
G
न्दो
G
G
न्त
L
गु
L
णो
G
यो
G
गु
L
L
धा
G
मा
G
G
श्चा
G
व्य
G
क्तो
G
व्य
G
स्त
L
L
G
स्तः
G
L
L
G
द्य
L
स्तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 4
<lg n="4">
  <l>यस्मादन्यन्नास्त्यपि नैवं परमार्थं</l>
  <l>दृश्यादन्यो निर्विषयज्ञानमयत्वात् ।</l>
  <l>ज्ञातृज्ञानज्ञेयविहीनोऽपि सदा ज्ञ-</l>
  <l>स्तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ ४ ॥</l>
</lg>
G
स्मा
G
G
न्य
G
न्ना
G
स्त्य
L
पि
L
नै
G
वं
G
L
L
मा
G
र्थं
G
दृ
G
श्या
G
G
न्यो
G
नि
G
र्वि
L
L
G
ज्ञा
G
L
L
G
त्वात्
G
ज्ञा
G
तृ
G
ज्ञा
G
G
ज्ञे
G
L
वि
L
ही
G
नो
G
पि
L
L
दा
G
ज्ञ
L
स्तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 5
<lg n="5">
  <l>आचार्येभ्यो लब्धसुसूक्ष्माच्युततत्त्वा</l>
  <l>वैराग्येणाभ्यासबलाच्चैव द्रढिम्ना ।</l>
  <l>भक्त्यैकाग्र्यध्यानपरा यं विदुरीशं</l>
  <l>तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ ५ ॥</l>
</lg>
G
चा
G
र्ये
G
भ्यो
G
G
ब्ध
L
सु
L
सू
G
क्ष्मा
G
च्यु
L
L
G
त्त्वा
G
वै
G
रा
G
ग्ये
G
णा
G
भ्या
G
L
L
ला
G
च्चै
G
G
द्र
L
ढि
G
म्ना
G
G
क्त्यै
G
का
G
ग्र्य
G
ध्या
G
L
L
रा
G
यं
G
वि
L
दु
L
री
G
शं
G
तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 12
<lg n="12">
  <l>सर्वत्रास्ते सर्वशरीरी न च सर्वः</l>
  <l>सर्वं वेत्त्येवेह न यं वेत्ति च सर्वः ।</l>
  <l>सर्वत्रान्तर्यामितयेत्थं यमयन्य-</l>
  <l>स्तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ १२ ॥</l>
</lg>
G
र्व
G
त्रा
G
स्ते
G
G
र्व
L
L
री
G
री
G
L
L
G
र्वः
G
G
र्वं
G
वे
G
त्त्ये
G
वे
G
L
L
यं
G
वे
G
त्ति
L
L
G
र्वः
G
G
र्व
G
त्रा
G
न्त
G
र्या
G
मि
L
L
ये
G
त्थं
G
L
L
G
न्य
L
स्तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 13
<lg n="13">
  <l>सर्वं दृष्ट्वा स्वात्मनि युक्त्या जगदेत-</l>
  <l>दृष्ट्वात्मानं चैवमजं सर्वजनेषु ।</l>
  <l>सर्वात्मैकोऽस्मीति विदुर्यं जनहृत्स्थं</l>
  <l>तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ १३ ॥</l>
</lg>
G
र्वं
G
दृ
G
ष्ट्वा
G
स्वा
G
त्म
L
नि
L
यु
G
क्त्या
G
L
L
दे
G
L
दृ
G
ष्ट्वा
G
त्मा
G
नं
G
चै
G
L
L
जं
G
G
र्व
L
L
ने
G
षु
L
G
र्वा
G
त्मै
G
को
G
स्मी
G
ति
L
वि
L
दु
G
र्यं
G
L
L
हृ
G
त्स्थं
G
तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 17
<lg n="17">
  <l>पश्यन्शुद्धोऽप्यक्षर एको गुणभेदा-</l>
  <l>न्नानाकारान्स्फाटिकवद्भाति विचित्रः ।</l>
  <l>भिन्नश्छिन्नश्चायमजः कर्मफलैर्य-</l>
  <l>स्तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ १७ ॥</l>
</lg>
G
श्य
G
न्शु
G
द्धो
G
प्य
G
क्ष
L
L
G
को
G
गु
L
L
भे
G
दा
G
न्ना
G
ना
G
का
G
रा
G
न्स्फा
G
टि
L
L
G
द्भा
G
ति
L
वि
L
चि
G
त्रः
G
भि
G
न्न
G
श्छि
G
न्न
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श्चा
G
L
L
जः
G
G
र्म
L
L
लै
G
र्य
L
स्तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 21
<lg n="21">
  <l>येनाविष्टो यस्य च शक्त्या यदधीनः</l>
  <l>क्षेत्रज्ञोऽयं कारयिता जन्तुषु कर्तुः ।</l>
  <l>कर्ता भोक्तात्मात्र हि यच्छक्त्यधिरूढ-</l>
  <l>स्तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ २१ ॥</l>
</lg>
ये
G
ना
G
वि
G
ष्टो
G
G
स्य
L
L
G
क्त्या
G
L
L
धी
G
नः
G
क्षे
G
त्र
G
ज्ञो
G
यं
G
का
G
L
यि
L
ता
G
G
न्तु
L
षु
L
G
र्तुः
G
G
र्ता
G
भो
G
क्ता
G
त्मा
G
त्र
L
हि
L
G
च्छ
G
क्त्य
L
धि
L
रू
G
L
स्तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 22
<lg n="22">
  <l>सृष्ट्वा सर्वं स्वात्मतयैवेत्थमतर्क्यं</l>
  <l>व्याप्याथान्तः कृत्स्नमिदं सृष्टमशेषम् ।</l>
  <l>सच्च त्यच्चाभूत्परमात्मा स य एक-</l>
  <l>स्तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ २२ ॥</l>
</lg>
सृ
G
ष्ट्वा
G
G
र्वं
G
स्वा
G
त्म
L
L
यै
G
वे
G
त्थ
L
L
G
र्क्यं
G
व्या
G
प्या
G
था
G
न्तः
G
कृ
G
त्स्न
L
मि
L
दं
G
सृ
G
ष्ट
L
L
शे
G
षम्
L
G
च्च
G
त्य
G
च्चा
G
भू
G
त्प
L
L
मा
G
त्मा
G
L
L
G
L
स्तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 26
<lg n="26">
  <l>दृष्ट्वा गीतास्वक्षरतत्त्वं विधिनाजं</l>
  <l>भक्त्या गुर्व्या लभ्य हृदिस्थं दृशिमात्रम् ।</l>
  <l>ध्यात्वा तस्मिन्नस्म्यहमित्यव विदुर्यं</l>
  <l>तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ २६ ॥</l>
</lg>
दृ
G
ष्ट्वा
G
गी
G
ता
G
स्व
G
क्ष
L
L
G
त्त्वं
G
वि
L
धि
L
ना
G
जं
G
G
क्त्या
G
गु
G
र्व्या
G
G
भ्य
L
हृ
L
दि
G
स्थं
G
दृ
L
शि
L
मा
G
त्रम्
L
ध्या
G
त्वा
G
G
स्मि
G
न्न
G
स्म्य
L
L
मि
G
त्य
L
L
वि
L
दु
G
र्यं
G
तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 37
<lg n="37">
  <l>सत्तामात्रं केवलविज्ञानमजं स-</l>
  <l>त्सूक्ष्मं नित्यं तत्त्वमसीत्यात्मसुताय ।</l>
  <l>साम्नामन्ते प्राह पिता यं विभुमाद्यं</l>
  <l>तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ ३७ ॥</l>
</lg>
G
त्ता
G
मा
G
त्रं
G
के
G
L
L
वि
G
ज्ञा
G
L
L
जं
G
L
त्सू
G
क्ष्मं
G
नि
G
त्यं
G
G
त्त्व
L
L
सी
G
त्या
G
त्म
L
सु
L
ता
G
L
सा
G
म्ना
G
G
न्ते
G
प्रा
G
L
पि
L
ता
G
यं
G
वि
L
भु
L
मा
G
द्यं
G
तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 39
<lg n="39">
  <l>ओतं प्रोतं यत्र च सर्वं गगनान्तं</l>
  <l>योऽस्थूलानण्वादिषु सिद्धोऽक्षरसंज्ञः ।</l>
  <l>ज्ञातातोऽन्यो नेत्युपलभ्यो न च वेद्य-</l>
  <l>स्तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ ३९ ॥</l>
</lg>
G
तं
G
प्रो
G
तं
G
G
त्र
L
L
G
र्वं
G
L
L
ना
G
न्तं
G
यो
G
स्थू
G
ला
G
G
ण्वा
G
दि
L
षु
L
सि
G
द्धो
G
क्ष
L
L
सं
G
ज्ञः
G
ज्ञा
G
ता
G
तो
G
न्यो
G
ने
G
त्यु
L
L
G
भ्यो
G
L
L
वे
G
द्य
L
स्तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 40
<lg n="40">
  <l>तावत्सर्वं सत्यमिवाभाति यदेत-</l>
  <l>द्यावत्सोऽस्मीत्यात्मनि यो ज्ञो न हि दृष्टः ।</l>
  <l>दृष्टे यस्मिन्सर्वमसत्यं भवतीदं</l>
  <l>तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ ४० ॥</l>
</lg>
ता
G
G
त्स
G
र्वं
G
G
त्य
L
मि
L
वा
G
भा
G
ति
L
L
दे
G
L
द्या
G
G
त्सो
G
स्मी
G
त्या
G
त्म
L
नि
L
यो
G
ज्ञो
G
L
हि
L
दृ
G
ष्टः
G
दृ
G
ष्टे
G
G
स्मि
G
न्स
G
र्व
L
L
G
त्यं
G
L
L
ती
G
दं
G
तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G
Verse 43
<lg n="43">
  <l>पायाद्भक्तं स्वात्मनि सन्तं पुरुषं यो</l>
  <l>भक्त्या स्तौतीत्याङ्गिरमं विष्णुरिमं माम् ।</l>
  <l>इत्यात्मानं स्वात्मनि संहृत्य सदैक-</l>
  <l>स्तं संसारध्वान्तविनाशं हरिमीडे ॥ ४३ ॥</l>
</lg>
पा
G
या
G
द्भ
G
क्तं
G
स्वा
G
त्म
L
नि
L
G
न्तं
G
पु
L
रु
L
षं
G
यो
G
G
क्त्या
G
स्तौ
G
ती
G
त्या
G
ङ्गि
L
L
मं
G
वि
G
ष्णु
L
रि
L
मं
G
माम्
G
G
त्या
G
त्मा
G
नं
G
स्वा
G
त्म
L
नि
L
सं
G
हृ
G
त्य
L
L
दै
G
L
स्तं
G
सं
G
सा
G
G
ध्वा
G
न्त
L
वि
L
ना
G
शं
G
L
रि
L
मी
G
डे
G