Reports » देवीभुजंगस्तोत्रम्
Updated 2026-03-05 03:54
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Verse-only texts: <lg> slugs do not contain 'lg' ✓ Passed (28/28)
Text
Devanagari text is well-formed ✓ Passed (141/141)
No leading or trailing spaces in text elements ✓ Passed (112/112)
Verse numbers match `n` attribute ✓ Passed (27/27)
Meter
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Verse 6
<lg n="6"> <l>शरीरेऽतिकष्टे रिपौ पुत्रवर्गे</l> <l>सदाभीतिमूले कलत्रे धने वा ।</l> <l>न कश्चिद्विरज्यत्यो देवि चित्रं</l> <l>कथं त्वत्कटाक्षं विना तत्त्वबोधः ॥ ६ ॥</l> </lg>
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ष्टे
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त्र
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र्गे
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स
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ति
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ले
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त्रे
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ध
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ने
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वा
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न
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क
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श्चि
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द्वि
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र
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ज्य
G
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त्यो
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दे
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वि
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त्रं
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क
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थं
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त्व
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त्क
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टा
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क्षं
G
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वि
L
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ना
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त
G
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त्त्व
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बो
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धः
G
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Verse 9
<lg n="9"> <l>निवृत्तिः प्रतिष्ठा च विद्या च शान्ति-</l> <l>स्तथा शान्त्यतीतेति पञ्चीकृताभिः ।</l> <l>कलाभिः परे पञ्चविंशात्मिकाभि-</l> <l>स्त्वमेकैव सेव्या शिवाभिन्नरूपा ॥ ९ ॥</l> </lg>
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नि
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वृ
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त्तिः
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प्र
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ति
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ष्ठा
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च
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वि
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द्या
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च
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शा
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न्ति
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स्त
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था
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शा
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न्त्य
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ती
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ते
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ति
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प
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ञ्ची
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कृ
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ता
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भिः
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क
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ला
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भिः
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प
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रे
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प
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ञ्च
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विं
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शा
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त्मि
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का
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भि
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स्त्व
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मे
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कै
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व
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से
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व्या
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शि
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वा
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भि
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न्न
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रू
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पा
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Verse 21
<lg n="21"> <l>मोवाकमाशास्महे देवि युष्म-</l> <l>त्पदाम्भोजयुग्माय तिग्माय गौरि ।</l> <l>विरिञ्च्यादिभास्वत्किरीटप्रतोली-</l> <l>प्रदीपायमानप्रभाभास्वराय ॥ २१ ॥</l> </lg>
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मो
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वा
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मा
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शा
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स्म
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हे
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दे
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वि
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यु
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ष्म
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त्प
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दा
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म्भो
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ज
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यु
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ग्मा
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य
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ति
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ग्मा
G
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य
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गौ
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रि
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वि
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रि
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ञ्च्या
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दि
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भा
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स्व
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त्कि
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री
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प्र
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तो
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ली
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प्र
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दी
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पा
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य
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मा
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न
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प्र
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भा
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भा
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स्व
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रा
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य
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Verse 28
<lg n="28"> <l>इति प्रेमभारेण किञ्चिन्मयोक्तं</l> <l>न बुध्यैव तत्त्वं मदीयं त्वदीयम् ।</l> <l>विनोदाय बालस्य मौर्ख्यं हि मात-</l> <l>स्तदेतत्प्रलापस्तुतिं मे गृहाण ॥ २८ ॥</l> </lg>
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इ
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ति
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प्रे
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म
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भा
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रे
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ण
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कि
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ञ्चि
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न्म
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क्तं
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न
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बु
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ध्यै
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व
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त
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त्त्वं
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दी
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यं
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त्व
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दी
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मौ
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र्ख्यं
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मा
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त
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स्त
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त
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हा
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ण
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