Stotrarnava /39
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शुद्धाशुद्धसूची
पृष्ठम्
पङ्क्तिः अशुद्धः
340
24
करुणारं
341
17
पूतना
26
"
शोभिताङ्क्षि
343
29
344
18
"
"
चतुर्मिश्च
आम. ह्यो
गातः
शुद्धः
करुणाकरं
पूतना
शोभिताङ्घ्रि
चतुर्भिश्च
अग्राह्यो
गतः
37
349
1+
स्थित:
स्थितः
18
"
दृट्वा
दृष्ट्वा
356
19
ममर्त्यः
मर्त्यः
357
13
जवा
जपा
359
7
वाधव
वाधर
2
8
"
द्वया
द्वयी
361
7
कचा
रुचा
8
"
भाग्भुज
भाग्भज
"
23
महंह सा
मंदहसा
364
5
कुरण्टक
कुरण्टक
367
28
विधं
विध
"
"
369
11
74
वर्व्यथा
84
जपन्
"
12
जनोऽय
379
17
लिप्त
"
18
सृजो
380
8
श्रित्र
जनो य
वलिप्त
व्यसृजो
श्चित्र
387
14
राज्ज्वा
राडज्ज्वा
394
33
भतुल
मतुल
400
28
त्युयुधु
युयुधु
401
22
ङ्घ्रि
ङ्घ्रि
404
17
यांन्तं
"
19
दुदूचीं
यान्तं
दुदीचीं
"
28
पूर्ण त्रयोशः
पूर्णत्रयीशः
31
"
केकयास्या
405
406
18
☑%
गर्भवत्या सयोषा
गर्भवत्यास योषा
7
चपि
चापि
ED,
पृष्ठम्
पङ्क्तिः अशुद्धः
340
24
करुणारं
341
17
पूतना
26
"
शोभिताङ्क्षि
343
29
344
18
"
"
चतुर्मिश्च
आम. ह्यो
गातः
शुद्धः
करुणाकरं
पूतना
शोभिताङ्घ्रि
चतुर्भिश्च
अग्राह्यो
गतः
37
349
1+
स्थित:
स्थितः
18
"
दृट्वा
दृष्ट्वा
356
19
ममर्त्यः
मर्त्यः
357
13
जवा
जपा
359
7
वाधव
वाधर
2
8
"
द्वया
द्वयी
361
7
कचा
रुचा
8
"
भाग्भुज
भाग्भज
"
23
महंह सा
मंदहसा
364
5
कुरण्टक
कुरण्टक
367
28
विधं
विध
"
"
369
11
74
वर्व्यथा
84
जपन्
"
12
जनोऽय
379
17
लिप्त
"
18
सृजो
380
8
श्रित्र
जनो य
वलिप्त
व्यसृजो
श्चित्र
387
14
राज्ज्वा
राडज्ज्वा
394
33
भतुल
मतुल
400
28
त्युयुधु
युयुधु
401
22
ङ्घ्रि
ङ्घ्रि
404
17
यांन्तं
"
19
दुदूचीं
यान्तं
दुदीचीं
"
28
पूर्ण त्रयोशः
पूर्णत्रयीशः
31
"
केकयास्या
405
406
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गर्भवत्या सयोषा
गर्भवत्यास योषा
7
चपि
चापि
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