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२७२
 
श्रीविष्णुस्तोत्रेषु
 
1.
 
यत्पादपङ्कजरजः श्रुतिभिर्विमृद्यं [ग्यं ]
यन्नाभिपङ्कजभवः कमलासनश्च ।
यन्नामसाररसिको भगवान् पुरारिः
 
श्रीरामचन्द्रमनिशं कलयामि चित्ते ॥ १६॥
 
हा राम हा रमण हा जगदेकवीर
 
हा नाथ हा रघुपते करुणालवाल ।
हा जानकीरमण हा जगदेकबन्धो
 
हा रामभद्र जनपालक पाहि नित्यम् ॥ १७॥
 
हा वीर हा दशरथात्मज मैथिलीश
 
हा देव हा पवनजप्रिय दीनबन्धो ।
 
हा धीर हा दशमुखान्तक लोकनाथ
 
हा भूप हा भरतपूर्वज पाहि नित्यम् ॥ १८ ॥
 
जानाति राम तव नामरुचिं महेशो
जानाति गौतमसती चरणप्रभावम् ।
जानाति दोर्बलपराक्रममीशचापो
 
जानात्यमोघपटुबाणगतिं पयोधिः ॥ १९ ॥
 
जानाति राम तव चित्तगतिं हनूमान्
 
जानाति राम तव सख्यरुचिं कपीन्द्रः ।
 
जानाति राम तव युद्धगतिं दशास्यो
 
जानाति राम विमतानुज एव सत्यम् ॥ २० ॥
 
श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम -
 
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
 
श्रीराम राम हनुमत्प्रिय राम राम
 
श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ २१ ॥
 
श्रीरामचन्द्र करुणाकर रामचन्द्र
 
राजेन्द्रचन्द्र रघुवंशसमुद्रचन्द्र ।
 
सुग्रीवनेत्रयुगलोत्पलपूर्णचन्द्र
 
सीतामनः कुमुदचन्द्र नमो नमस्ते ॥ २२ ॥
 
वन्देन्दु[ऽब्ज] मौलिमणिशोभिपदारविन्दं
वन्दे सुचापशरशोभिकरारविन्दम् ।
 
बिमतस्य शत्रो रावणस्य अनुजः विभीषणः ।