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श्री वेंकटेश सुप्रभातम्
 
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श्रीवत्स चिह्न शरणागतपारिजात
 

श्री वेंकटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥ २२ ॥
 
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कन्दर्पदर्पहरसुन्दरदिव्यमूर्ते

कान्ताकुचाम्बुरुहकुड्मललोलदृष्टे ।

कल्याणनिर्मलगुणाकरदिव्यकीर्ते
 

श्री वेंकटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥ २३ ॥
 
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मीनाकृते कमठ कोल नृसिंह वर्णिन्
 

स्वामिन् परश्वथतपोधन रामचन्द्र ।

शेषांशराम यदुनन्दन कल्किरूप
 

श्री वेंकटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥ २४ ॥
 
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एलालवङ्गघनसारसुगन्धतीर्थं
 

दिव्यं वियत्सरिति हेमघटेषु पूर्णम् ।
 
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धृत्वाऽद्य
वैदिकशिखामणः प्रहृष्टाः
 

तिष्ठन्ति वेंकटपते तव सुप्रभातम् ॥ २५ ॥
 
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भास्वानुदेति विकचानि सरोरुहाणि

संपूरयन्ति निनदैः ककुभो विहङ्गाः ।

श्री वैष्णवास्सततमर्थितमङ्गलास्ते
 

धामाश्रयन्ति तव वेंकट सुप्रभातम् ॥ २६ ॥
 
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ब्रह्मादयस्तुसुरवरास्समहर्षयस्ते
 

सन्तस्सनन्दनमुखास्तव योगिवर्याः ।
 

धामान्तिके त हि मङ्गलवस्तु हस्ताः
 

श्री वेंकटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥ २७ ॥
 
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