This page does not need to be proofread.

<page>
<p lang="sa">
॥ श्रीमद्वाल्मीकि रामायणम् ॥
 
</p>
<p lang="sa">
रू. अ.
 
</p>
<p lang="sa">
बाळरामायणम्
 
</p>
<p lang="sa">
श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् -
 
</p>
<p lang="sa">
रू. अ.
 
</p>
<p lang="sa">

 
</p>
<p lang="sa">

 
"
 
</p>
<p lang="sa">&quot;</p>
<p lang="sa">
आरण्यकाण्डः
 
</p>
<p lang="sa">
१ ८.
 
"
 
</p>
<p lang="sa">&quot;</p>
<p lang="sa">
किष्किन्धाकाण्डः
 
</p>
<p lang="sa">
१ ८
 
</p>
<p lang="sa">

 
"
</p>
<p lang="sa">&quot;
सुन्दरकाण्डः
 
</p>
<p lang="sa">

 
</p>
<p lang="sa">
0.
 
"
</p>
<p lang="sa">&quot;
युद्धकाण्डः
 
</p>
<p lang="sa">

 
</p>
<p lang="sa">

 
</p>
<p lang="sa">
मूलमाश्रम् (सम्पुटद्वयम्.)... १०...
 
"
</p>
<p lang="sa">&quot;
बालकाण्डः
 
"
 
</p>
<p lang="sa">&quot;</p>
<p lang="sa">
१८
 
</p>
<p lang="sa">
॥ श्रीमन्महाभारतम् ॥
 
</p>
<p lang="sa">
श्रीमन्महाभारतम् — अष्टादश (१८) सम्पुटात्मकम्
 
</p>
<p lang="sa">
॥ श्रीमद्भागवतम् ॥
 
</p>
<p lang="sa">
श्रीमद्भागवतम् - (मूलमात्रम्) सम्पुटद्वयम्
 
</p>
<p lang="sa">
॥ संस्कृतधातुमाला ॥
 
</p>
<p lang="sa">
महच्ची टिका चतुष्टयमुद्रिता.)
 
</p>
<p lang="sa">
संस्कृतभाषाव्यवहारार्थं नित्योपयुक्तानाम् पञ्चाशत् धातूनाम्

कृत्प्रत्ययादिविविध परिनिष्ठितरूपाणि पट्टिका क्रमेण सूचितानि .

संस्कृताभ्यासिनाम् बहूपयुक्तानि भवन्ति । कतिचिदेव

मुद्रितानि ॥
 
</p>
<p lang="sa">
३८
 
</p>
<p lang="sa">
रू. अ.

७० Q.
 
</p>
<p lang="sa">
१५०-
 
</p>
<p lang="sa">
रू. १-०-०-
 
</p>
<p lang="sa">
॥ बृहत्स्तोत्ररत्नाकरः ॥ विज्ञानमा
 
</p>
<p lang="sa">
३ ०
 
</p>
<p lang="sa">
बृहत्स्तोत्ररत्नाकरः प्रथमभागः सम्पुटद्वयात्मकः प्रथमसम्पुटे

(गणपति सुब्रह्मण्य शिवस्तोत्राणि आहत्य (१०४) मूल्यं •

द्वितीयसंपुटात्मायं च तदितर विष्ण्वादिस्तोत्रभागाश्च क्रमेण मुद्राप

यिष्यन्ते ॥
 
</p>
<p lang="sa">
अन्न कार्यालये द्रविडान्ध्राङ्गलभाषामयाः ग्रन्थाः सर्वेऽप्युपलभ्यन्ते ॥

वाविळ रामस्वामिशास्त्रलु अण्ड् सन्
 
</p>
<p lang="sa">
पोस्ट बाक्स् १३७२,
 
</p>
<p lang="sa">
२९२. एस्प्लनेड्. चेन्नपुरी. १.
 
</p>
</page>