2026-01-24 07:15:13 by akprasad
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<ignore lang="sa">स्तोत्रग्रन्थमाला - तृतीयो भागः
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<verse lang="sa">ञाक्षरयुतजाधात्वर्थे परिनिष्ठित नैष्ठिकगम्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २७ ॥
</verse>
<ignore lang="sa">९२
</ignore>
<verse lang="sa">टङ्कारध्वनिकारिधनुर्धरशातशराहतदैत्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २८ ॥
</verse>
<verse lang="sa">ठमिति मनुं वा समिति मनुं वा जपतां सिद्धिद नाथ हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २९ ॥
</verse>
<verse lang="sa">डमरुकरेश्वरपूजितनिर्जितरावणदानव राम हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३० ॥
</verse>
<verse lang="sa">ढक्कावाद्यप्रिय भयवारण विनयविवर्जितदूर हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३१ ॥
</verse>
<verse lang="sa">णटधात्वर्थे पण्डितमण्डितसकलावयवोद्भासि हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३२ ॥
</verse>
<verse lang="sa">तत्त्वमसीति व्याहृतिवाच्यप्राच्यधिनायकपूज्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३३ ॥
</verse>
<verse lang="sa">थूत्कारानिलवेगनभोगतसप्तसमुद्रवराह हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३४ ॥
</verse>
<verse lang="sa">दयितालिङ्गितवक्षोभासुर भूसुरपूजितपाद हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३५ ॥
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<ignore lang="sa">स्तोत्रग्रन्थमाला - तृतीयो भागः
<verse lang="sa">ञाक्षरयुतजाधात्वर्थे परिनिष्ठित नैष्ठिकगम्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २७ ॥
<ignore lang="sa">९२
<verse lang="sa">टङ्कारध्वनिकारिधनुर्धरशातशराहतदैत्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २८ ॥
<verse lang="sa">ठमिति मनुं वा समिति मनुं वा जपतां सिद्धिद नाथ हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २९ ॥
<verse lang="sa">डमरुकरेश्वरपूजितनिर्जितरावणदानव राम हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३० ॥
<verse lang="sa">ढक्कावाद्यप्रिय भयवारण विनयविवर्जितदूर हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३१ ॥
<verse lang="sa">णटधात्वर्थे पण्डितमण्डितसकलावयवोद्भासि हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३२ ॥
<verse lang="sa">तत्त्वमसीति व्याहृतिवाच्यप्राच्यधिनायकपूज्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३३ ॥
<verse lang="sa">थूत्कारानिलवेगनभोगतसप्तसमुद्रवराह हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३४ ॥
<verse lang="sa">दयितालिङ्गितवक्षोभासुर भूसुरपूजितपाद हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ३५ ॥
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